जोधपुर , जनवरी 31 -- राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर ने मशहूर फिल्म निर्माता विक्रम पी. भट्ट, उनकी पत्नी श्वेताम्बरी वी. भट्ट और सह-आरोपी मेहबूब अंसारी द्वारा दायर जमानत याचिकायें खारिज कर दी हैं।
न्यायमूर्ति विनोद कुमार भरवानी की एकलपीठ ने 31 जनवरी को यह आदेश जारी किया। अदालत ने कहा कि मामले में अब भी महत्वपूर्ण जांच लंबित हैऔर आरोपियों की भूमिका गंभीर आर्थिक अपराधों से जुड़ी दिखाई देती है। लिहाजा उन्हें फिलहाल जमानत देना न्यायोचित नहीं होगा।
मामला उदयपुर निवासी शिकायतकर्ता डॉ अजय मुर्डिया द्वारा दायर प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी और अन्य सहयोगियों ने चार फिल्मों के नाम पर करीब 47 करोड़ रुपये का करार किया था। शिकायत में कहा गया है कि फिल्म निर्माण के नाम पर विभिन्न चरणों में 42 करोड़ 70 लाख रुपये वसूले गए, जबकि वास्तविकता में केवल एक फिल्म ही रिलीज़ हुई और शेष फिल्मों का निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ।
प्राथमिकी में यह भी आरोप है कि फिल्म निर्माण के लिये प्राप्त राशि को फर्जी कंपनियों, फर्जी बिलों, नकली खर्चों और बेनामी खातों के माध्यम से इधर-उधर स्थानांतरित किया गया। मेहबूब अंसारी पर आरोप है कि उन्होंने अलग-अलग नामों से फर्जी बिल तैयार करके बड़ी रकम अपने और सहयोगियों के खातों में जमा करवाई। जांच में कई खाते, लेन-देन और डिजिटल लेनदेन संदेहास्पद पाये गये हैं।
न्यायालय ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से यह स्पष्ट होता है कि आरोपियों के खिलाफ लगाये गये आरोप गंभीर आर्थिक अपराध की श्रेणी में आते हैं। जांच अधिकारी के अनुसार अभी कई महत्वपूर्ण गवाहों से पूछताछ शेष है। ऐसे में अभियुक्तों को जमानत दी जाती है तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपियों द्वारा दायर कुछ याचिकाएं पहले भी खारिज की जा चुकी हैं।
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