बेरुत , जुलाई 24 -- वर्ष 1972 में इजराइल के लॉड हवाई अड्डे (अब बेन गुरियन हवाई अड्डा) पर हुए भीषण आतंकी हमले में शामिल अंतिम जीवित जापानी हमलावर कोज़ो ओकामोतो का 78 वर्ष की आयु में बेरुत में निधन हो गया।

वामपंथी उग्रवादी समूह 'जापानी रेड आर्मी' (जेआरए) और फिलिस्तीनी सशस्त्र समूह 'पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ फिलिस्तीन' (पीएफएलपी) से जुड़ा ओकामोतो लंबे समय से बीमार चल रहा था।

ओकामोतो वामपंथी उग्रवादी समूह 'जापानी रेड आर्मी' का सदस्य था। जापानी रेड आर्मी का प्राथमिक उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सशस्त्र वामपंथी क्रांति लाना था। वे जापानी सरकार के साथ-साथ अमेरिकी साम्राज्यवाद और वैश्विक पूंजीवाद को उखाड़ फेंकना चाहते थे और उनका मानना था कि इजराइल अमेरिकी साम्राज्यवाद का एक प्रमुख केंद्र है।

इसी क्रम में 30 मई 1972 को ओकामोतो ने अपने दो अन्य साथियों, सुयोशी ओकुदैरा और यासुयुकी यासुदा के साथ मिलकर लॉड हवाई अड्डे पर राइफलों और हथगोले से अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गयी थी और 70 से अधिक लोग घायल हो गये थे।

हमले के दौरान ओकामोतो के दोनों साथी मारे गए थे, जबकि घायल ओकामोतो को पकड़ लिया गया था और इजराइल की एक अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनायी थी। बाद में 1985 में इजराइल और एक फिलिस्तीनी समूह के बीच हुए बंदियों के आदान-प्रदान के तहत उसे रिहा कर दिया गया था, जिसके बाद वह पीएफएलपी के संरक्षण में लेबनान में रहने लगा, जहाँ उसने इस्लाम धर्म अपना लिया।

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