मुंबई , जुलाई 26 -- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के साथ ही इस बार मानसून की अनिश्चितताओं से अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां बढ़ी है, लेकिन फिलहाल उन्हें इस वर्ष के बजट अनुमानों पर दोबारा निगाह डालने की जरूरत नहीं लगती।
श्रीमती सीतारमण ने एक निजी टेलीविजन चैनल के कार्यक्रम में पश्चिम एशिया की लड़ाई फिर भड़काने से भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि पश्चिम एशिया की लड़ाई और होर्मूज जलडमरूमध्य के रास्ते वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही में रुकावट से कच्चे तेल और उर्वरकों के दामों मैं जिस तरह उछाल आया उसके चलते मुद्रास्फीति का दबाव बाहर से आ रहा था। लेकिन इस वर्ष अल नीनो के असर से देश में कहीं अतिवृष्टि तो कहीं अनावृष्टि की स्थितियां हैं, पीने के पानी और सिंचाई तथा फसलों के उत्पादन को लेकर भी चुनौती पैदा हुई है। इससे अब घरेलू परेशानियां भी मुद्रास्फीति को बढ़ाने वाली है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पश्चिम एशिया के जूजूचे क्षेत्र में माल की आवाज आई के जोखिम प्रीमियम के लिए संसाधनों का पर्याप्त प्रावधान किया है। देश के अंदर पेट्रोलियम और उर्वरक की मूल्य स्थिरता के लिए भी पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं।
वित्त मंत्री ने कहा की इन सब के बावजूद फिलहाल में नहीं लगता कि उन्हें 2026-27 के बजट के अपने अनुमानों पर अभी दोबारा से निगाह हटाने की आवश्यकता है।
वित्त मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया की संकट के चलते खनिज तेल, यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित हुए। बीच में सल्फेट की भी कमी आई।
सरकार ने पेट्रोलियम कीमतों को संभालने के लिए प्रावधान किया, उर्वरकों का आयत महंगा होने की बावजूद उनकी कीमतों को स्थिर रखने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था की है।
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