पटना , फरवरी 07 -- एग्री स्टैक अभियान के अंतर्गत राज्य में किसानों की फार्मर रजिस्ट्री को गति देने के लिए चल रहे तृतीय चरण के विशेष अभियान की तिथि बढ़ा दी गई है।

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह अभियान 02 फरवरी से 06 फरवरी 2026 तक चल रहा था, जिसे अब विस्तारित करते हुए 11 फरवरी 2026 तक संचालित करने का निर्णय लिया गया है।

प्रधान सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग सीके अनिल तथा प्रधान सचिव, कृषि विभाग नर्मदेश्वर लाल द्वारा सभी जिला पदाधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किया गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि अब तक राज्य में 43 प्रतिशत किसानों का फार्मर आईडी तैयार किया जा चुका है। भारत सरकार से एससीए योजना की द्वितीय किस्त प्राप्त करने के लिए 50 प्रतिशत किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूर्ण करना अनिवार्य है।

निर्देशों के अनुसार सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को विस्तारित तिथि की जानकारी दी जाएगी तथा कैम्प की तिथि और स्थान का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाएगा। कैम्प में आने वाले किसानों का ई-केवाईसी सत्यापन, बकेट क्लेम की प्रक्रिया पूर्ण करते हुए फार्मर आईडी तैयार कराने पर विशेष बल दिया गया है।राज्य सरकार ने जिलों को निर्देशित किया है कि फार्मर रजिस्ट्री के कार्य में संलग्न सभी अधिकारी एवं कर्मचारी सक्रिय रूप से अभियान में भाग लें, जिससे अधिक से अधिक किसानों का पंजीकरण शीघ्रता से सुनिश्चित किया जा सके।

उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि एग्रीस्टैक अभियान के तहत किसानों की फार्मर रजिस्ट्री केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसानों को योजनाओं का सीधा लाभ दिलाने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। राज्य सरकार का प्रयास है कि राज्य का कोई भी किसान इस व्यवस्था से वंचित न रहे। इसी उद्देश्य से तृतीय चरण के विशेष अभियान की तिथि 11 फरवरी तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इससे किसान भाईयों को सरकार की कृषि से संबंधित सभी योजनाओं का लाभ तो मिलेगा ही डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके खाते तक राशि भी पहुंच सकेगी। सभी किसानों से अपील है कि वे अपने नजदीकी कैम्प में जाकर अपना पंजीकरण अवश्य कराएं। साथ ही जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि कैम्प का व्यापक प्रचार-प्रसार करें और किसानों को हर संभव सहयोग प्रदान करें। यह अभियान किसानों की सुविधा और अधिकार से जुड़ा है, इसमें जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

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