श्रीनगर , दिसंबर 10 -- जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मानवाधिकार दिवस के अवसर पर देश भर के सभी राजनीतिक दलों, सार्वजनिक संस्थानों तथा नागरिक समाज समूहों से भारतीय गणराज्य की नींव बनाने वाले धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराने का आह्वान किया।
श्री अब्दुल्ला ने एक बयान में कहा, "मानवाधिकार दिवस सिर्फ एक प्रतीकात्मक पालन नहीं है, बल्कि यह धर्म, क्षेत्र, भाषा या जातीयता की परवाह किए बिना सभी नागरिकों की गरिमा, समानता और स्वतंत्रता को बनाए रखने की हमारी सामूहिक जिम्मेदारी की एक शक्तिशाली याद दिलाता है।" उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविध देश में मानवाधिकारों की सुरक्षा धर्मनिरपेक्षता की सुरक्षा से अविभाज्य है।
उन्होंने कहा, "हमारे देश का धर्मनिरपेक्ष चेहरा कोई अमूर्त आदर्श नहीं है। यह वही ताना-बाना है जो हमें एक राष्ट्र के रूप में एक साथ बांधता है। ऐसे समय में जब विभाजनकारी ताकतें हमारे साझा मूल्यों को खत्म करने की धमकी दे रही हैं, यह अनिवार्य है कि हर राजनीतिक दल पक्षपातपूर्ण हितों से ऊपर उठे और न्याय, सद्भाव और आपसी सम्मान के सिद्धांतों की रक्षा करे।"पूर्व मुख्यमंत्री ने राजनीतिक नेताओं से ऐसे बयानबाजी या कार्यों से बचने का आग्रह किया जो ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकते हैं और इसके बजाय ऐसी नीतियों का समर्थन करें जो समावेशिता को मजबूत करें और हाशिए पर पड़े समुदायों को सशक्त बनाएं।
उन्होंने कहा, "मानवाधिकार डर और संदेह के माहौल में फल-फूल नहीं सकते। वे तभी पनपते हैं जब हर व्यक्ति सुरक्षित, सम्मानित और कानून के सामने समान महसूस करता है।"उन्होंने दोहराया कि धर्मनिरपेक्षता का संरक्षण केवल एक समूह का कर्तव्य नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी हितधारकों के बीच नए सिरे से बातचीत, सहानुभूति और सहयोग का आह्वान किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत बहुलवाद और लोकतांत्रिक आदर्शों का प्रतीक बना रहे।
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