नयी दिल्ली, अगस्त 24 -- वैध अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आसान बनाने और फ़ार्मा उत्पादों के गलत इस्तेमाल को रोकने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के तहत आने वाले सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ नारकोटिक्स (सीबीएन) और वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा स्थापित फ़ार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ़ इंडिया (फार्मेक्सिल) ने सोमवार को एक समझौता ज्ञापन पर साइन किए।

हस्ताक्षर समारोह ग्वालियर में सीबीएन के मुख्यालय पर हुआ।

वित्त मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार एक्टिव फ़ार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई), बल्क ड्रग्स, फ़ॉर्मूलेशन, बायोलॉजिक्स और मेडिकल डिवाइस के प्रमुख वैश्विक सप्लायर के तौर पर भारत की स्थिति को देखते हुए, इस समझौते का मकसद देश के के फ़ार्मास्युटिकल निर्यात को बढ़ावा देने और प्रभावी नियामकीय निगरानी के बीच संतुलन बनाना है।

नशीले द्रव्यों के अवध कारोबार पर रोक से संबंधित 1985 के कानून के तहत सीबीएन की भूमिका कारोबार की विधवत सुविधा, विनियमन और प्रवर्तन की है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित