नयी दिल्ली , नवंबर 18 -- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में अब जंगली जानवरों और धान जलभराव के कारण फसल के होने वाले नुकसान को भी शामिल कर लिया गया है। इससे संबंधित नयी प्रक्रियाएं खरीफ 2026 के सत्र से लागू होंगी।
यह जानकारी मंगलवार को यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति में दी गयी। नए नियम के अनुसार अगर कोई जानवर किसी किसान की बीमित फसल को नुकसान पहुंचाता है तो उसे बीमे की रकम मिल सकेगी। फसल बीमा का लाभ लेने के लिए किसान को जंगली जानवर के फसल को नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर फसल बीमा ऐप पर जियो-टैग्ड फोटो सहित दर्ज करनी होगी।
इसमें कहा गया है कि जंगली जानवरों से हुए फसल के नुकसान को 'स्थानीयकृत जोखिम श्रेणी' में पाँचवें 'ऐड-ऑन कवर' के रूप में मान्यता दी गई है। राज्यों को ऐसे प्रभावित इलाकों की पहचान करने और नुकसान पहुंचाने वाले जंगली जानवरों की सूची जारी करने को कहा गया है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने मंत्रालय का कहना है कि यह कदम लंबे समय से राज्यों की मांगों के अनुरूप है और इसका उद्देश्य अचानक होने वाले नुकसान से किसानों को राहत देना है। इसी के साथ धान के जलभराव से होने वाले नुकसान को भी 'स्थानीयकृत आपदा श्रेणी' में दोबारा शामिल कर लिया गया है। वर्ष 2018 में इस जोखिम को हटाए जाने के बाद किसानों को बीमा सुरक्षा को लेकर समस्या आ रही थी। जलभराव के चलते तटीय और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में धान के किसानों को अक्सर जलभराव से भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
गौरतलब है कि देशभर में किसान लंबे समय से हाथी, जंगली सूअर, नीलगाय, हिरन और बंदरों जैसे जंगली जानवरों के हमलों के कारण फसल के नुकसान का सामना करते रहे हैं। यह समस्या जंगलों के पास खेती करने वाले किसानों को अधिक आती है। अब तक ऐसे नुकसान फसल बीमा योजना के दायरे में नहीं आते थे, जिसके कारण किसानों को भारी नुकसान हो जाता था। दूसरी और तटीय एवं बाढ़ संभावित क्षेत्रों में धान के किसानों को वर्षा और नदी-नालों के उफान से होने वाले जलभराव के कारण समान रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ता रहा है।
इस मामले में गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वीकृत कर दिया है। मंत्रालय का कहना है कि नई प्रक्रियाएँ वैज्ञानिक, पारदर्शी और अधिक व्यावहारिक हैं, जिनसे दावे समय से और तकनीक-आधारित तरीके से तय हो सकेंगे।
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