नई दिल्ली , नवम्बर 3 -- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसानों को नाममात्र की क्लेम राशि मिलने की शिकायतों पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को दिल्ली पहुंचते ही मंत्रालय में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। उन्होंने बीमा कंपनियों और वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर मामले की गहराई से जांच के निर्देश दिए और महाराष्ट्र के किसानों को वर्चुअल माध्यम से जोड़कर उनकी समस्याएं प्रत्यक्ष सुनीं।
शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों को 1, 3 या 5 रुपये का फसल बीमा क्लेम मिलना उनके साथ मजाक है। सरकार इस तरह की विसंगतियों को बर्दाश्त नहीं करेगी और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को क्लेम राशि शीघ्र और एक साथ मिलनी चाहिए तथा क्षति का आंकलन सटीक और वैज्ञानिक प्रणाली से होना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक सुरक्षा कवच के रूप में संचालित की जा रही है, लेकिन कुछ मामलों में मिली शिकायतें योजना की साख को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सीहोर जिले के कुछ किसानों को फसल बीमा कराने के बावजूद नुकसान होने पर "जीरो लास" दिखाया गया और मात्र 1 रुपये का क्लेम दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि यह कौन-सी पद्धति है जिससे क्षति का इतना अल्प आंकलन हुआ।
बैठक में शिवराज सिंह ने महाराष्ट्र के कृषि आयुक्त, राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों और अकोला जिले के कुछ किसानों को भी वर्चुअल रूप से जोड़ा। उन्होंने किसानों से विस्तार से जानकारी लेकर संबंधित अफसरों और बीमा कंपनियों से जवाब मांगा। अफसरों द्वारा क्लेम की रकम एडजस्टमेंट या तकनीकी प्रक्रिया के चलते कम दिखाने की बात पर केंद्रीय मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसी विसंगतियों को तुरंत दूर किया जाए।
शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के सीईओ को सभी मामलों की फील्ड जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि 1, 2 या 5 रुपये के क्लेम देने के मामलों की तह तक जाकर पड़ताल की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसानों को वास्तविक नुकसान के अनुसार मुआवजा मिले। उन्होंने निर्देश दिया कि बीमा कंपनियों का प्रतिनिधि सर्वेक्षण के समय अनिवार्य रूप से उपस्थित रहे ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
केंद्रीय मंत्री ने बैठक में यह भी कहा कि कुछ राज्य अपने हिस्से की सब्सिडी समय पर जमा नहीं करते, जिससे किसानों को क्लेम राशि में देरी होती है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राज्यों से समन्वय कर राशि समय पर जमा कराई जाए और देरी करने वाले राज्यों से 12 प्रतिशत ब्याज वसूला जाए।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और किसी भी स्तर पर उनकी उपेक्षा या अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने योजना में तकनीकी सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सुझाव भी मांगे ताकि भविष्य में इस तरह की विसंगतियां न हों।
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