नैनीताल , अक्टूबर 14 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश में फर्जी शिक्षक प्रकरण का दायर बढ़ाते हुए अब उच्च शिक्षा जगत में भी अध्यापकों और प्राध्यापकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन के निर्देश दिए हैं।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने ये निर्देश बुधवार को हल्द्वानी की दमुवाढूंगा स्थित स्टूडेंट गार्जियन वेलफेयर कमेटी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए।

प्रदेश सरकार के शिक्षा महकमा की ओर से आज अदालत में प्रगति रिपोर्ट पेश की गयी। कहा गया कि इस मामले में विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) की ओर से जांच अभी जारी है। 85 प्रतिशत शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन का कार्य पूरा हो गया है। 15 प्रतिशत शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच चल रही है। फर्जी दस्तावेज वाले सैकड़ों फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

अदालत ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए इसका दायरा बढ़ाते हुए उच्च शिक्षा जगत तक कर दिया है। अदालत ने कहा कि सरकारी डिग्री कालेजों, पीजी कालेज और सरकारी अनुदान प्राप्त विश्वविद्यालयों के सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन जरूरी है।

उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि फर्जी शिक्षकों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। अदालत ने सचिव उच्च शिक्षा को निर्देश दिए कि सभी अध्यापकों और प्राध्यापकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन का कार्य जल्दी से जल्दी करें। साथ ही सरकार को कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें। इसके साथ ही अदालत ने शेष 15 प्रतिशत शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का भी सत्यापन जल्द करने को कहा है।

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