रायपुर , अगस्त 19 -- छत्तीसगढ़ में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर शासकीय सेवा में कार्यरत लोगों के मामलों की जांच में तेजी लाने के लिए विशेष मेडिकल बोर्ड की व्यवस्था की जाएगी, जिसकी सूचना बुधवार को विभाग ने दी और कहा कि राज्य एवं संभागीय मेडिकल बोर्ड के माध्यम से संबंधित प्रकरणों की जांच कर निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत करने की प्रक्रिया तय की जाएगी।
समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की संयुक्त बैठक में मंगलवार को महानदी भवन मंत्रालय में दिव्यांगजनों, उभयलिंगी समुदाय और नशा पीड़ितों से जुड़े विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर शासकीय सेवा में कार्यरत 186 व्यक्तियों से संबंधित प्रकरणों की जांच सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य मेडिकल बोर्ड अथवा संभागीय मेडिकल बोर्ड से कराई जानी है। संबंधित व्यक्तियों को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर परीक्षण कराने के निर्देश जारी करने और उनकी दिव्यांगता की भौतिक जांच की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई।
अधिकारियों ने बताया कि फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर शासकीय सेवाओं में कार्यरत व्यक्तियों की जांच के लिए राज्य एवं संभागीय मेडिकल बोर्ड में परीक्षण की प्रक्रिया को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे।
बैठक में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और विशिष्ट दिव्यांगता पहचान-पत्र (यूडीआईडी) कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी जोर दिया गया। मेडिकल बोर्ड में विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष मेडिकल बोर्ड और दिव्यांगता परीक्षण शिविर आयोजित करने पर चर्चा हुई। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी होने पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं लेने पर भी सहमति बनी।
दोनों मंत्रियों ने उभयलिंगी समुदाय के लिए लिंग पुनर्निर्धारण शल्य चिकित्सा (एसआरएस) से संबंधित सहायता की भी समीक्षा की। सहायता अनुदान के दिशा-निर्देशों में आवश्यक सर्जरी को शामिल करने और निर्धारित दरों को वर्तमान बाजार दर के अनुरूप संशोधित करने पर विचार किया गया। शासकीय अस्पतालों में उभयलिंगी व्यक्तियों के लिए पृथक उभयलिंगी क्लीनिक अथवा वार्ड की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।
बैठक में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित नशामुक्ति केंद्रों के पंजीयन, उपचार व्यवस्था और उनके सुदृढ़ीकरण की समीक्षा की गई। मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम-2017 के प्रावधानों के अनुरूप केंद्रों के संचालन तथा वहां उपचाररत व्यक्तियों को दी जाने वाली दवाओं के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने पर विचार किया गया।
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