पटना , जून 15 -- िहार में ग्रामीण आधारभूत संरचना के विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत सतत कार्रवाई की जा रही है। इस क्रम में विभाग ने निविदा प्रक्रिया में अनियमितता तथा निर्माण कार्यों में गंभीर लापरवाही बरतने के मामलों में तीन संवेदकों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से अगले दस वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि पूर्वी चंपारण जिले के एक संवेदक द्वारा मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के अंतर्गत एक निविदा में ईपीएफ निबंधन से संबंधित फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे। विभागीय सत्यापन एवं संबंधित प्राधिकार से प्राप्त रिपोर्ट में यह पाया गया कि प्रस्तुत दस्तावेज और उसमें उल्लिखित एस्टैब्लिशमेंट कोड का विवरण वास्तविक अभिलेखों से मेल नहीं खाता है। संवेदक को स्पष्टीकरण का पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं होने पर विभाग द्वारा नियमानुसार उन्हें दस वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। वहीं मुजफ्फरपुर जिले के एक संवेदक के विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की गई है। विभागीय जांच में पाया गया कि मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के अंतर्गत आमंत्रित दो निविदाओं में प्रस्तुत कुछ दस्तावेज निर्धारित मानकों एवं सत्यापन प्रक्रिया में सही नहीं पाए गए। अनुभव प्रमाण-पत्र, भुगतान प्रमाण-पत्र तथा बैंक संबंधी अभिलेखों के सत्यापन के दौरान गंभीर विसंगतियां सामने आने के बाद संवेदक से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन निर्धारित अवधि के भीतर संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। जिसके परिणामस्वरूप विभाग द्वारा नियमानुसार उन्हें भी दस वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।

इसके अतिरिक्त विभाग ने निर्माण कार्यों में गंभीर लापरवाही के मामलों में भी सख्त रुख अपनाया है। दरभंगा जिले के एक संवेदक को बिरौल कार्य प्रमंडल के अंतर्गत स्वीकृत ग्रामीण पथ निर्माण कार्य समय-सीमा के भीतर पूर्ण नहीं करने तथा कार्य प्रगति संबंधी तथ्यों में गंभीर विसंगति पाए जाने के कारण ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है।

ग्रामीण कार्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि विकास योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता, भ्रामक सूचना, जाली दस्तावेज अथवा कार्य निष्पादन में लापरवाही को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभाग द्वारा सभी निविदाओं एवं निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी, तकनीकी परीक्षण और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। साथ ही योजनाओं का क्रियान्वयन पूर्ण पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही के साथ सुनिश्चित किया जा रहा है।

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