इंदौर/ भोपाल , मई 15 -- मध्यप्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) इंदौर ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर संपत्ति का मूल्य बढ़ाकर केनरा बैंक से ऋण प्राप्त करने तथा बैंक को करोड़ों रुपये की क्षति पहुंचाने के आरोप में पांच बैंक अधिकारियों और एक लाभार्थी के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया है।
ईओडब्ल्यू सूत्रों के अनुसार आरोपी विमलेश चतुर्वेदी, प्रोपराइटर मेसर्स ए.वी. ग्राफिक्स एंड ट्रेडिंग, ने इंदौर के मनीष बाग क्षेत्र स्थित एक विवादित भूखंड के कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उसकी कीमत वास्तविक मूल्य से कई गुना अधिक दर्शाई और उसे केनरा बैंक में बंधक रखकर लगभग एक करोड़ 95 लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया।
जांच में पाया गया कि संबंधित भूखंड का वास्तविक मूल्य लगभग 13 लाख 75 हजार रुपये था, जबकि दस्तावेजों में इसे एक करोड़ 25 लाख रुपये का दर्शाया गया। आरोप है कि भुगतान के लिए एचडीएफसी बैंक के चेक का उल्लेख करते हुए फर्जी पंजीयन दस्तावेज तैयार कराए गए।
ईओडब्ल्यू के अनुसार आरोपी ने 21 दिसंबर 2023 को कलर प्रिंटिंग मशीन खरीदने के लिए एक करोड़ 75 लाख रुपये का टर्म लोन तथा 20 लाख रुपये की नकद ऋण सीमा (सीसी लिमिट) के लिए आवेदन किया था।
प्रकरण में तत्कालीन शाखा प्रबंधक तरुण भार्गव, सेक्शन हेड कौशिक कुमार प्रबुद्ध, प्रोसेसिंग अधिकारी खुशबू सिलावट तथा मंडल प्रबंधक शर्मिष्ठा सिंह पर बैंक नियमों की अनदेखी कर बिना समुचित भौतिक सत्यापन और वैध मूल्यांकन के ऋण स्वीकृत करने का आरोप है।
जांच एजेंसी के अनुसार बैंक सर्कुलर के तहत एक करोड़ रुपये से अधिक के व्यावसायिक ऋण के लिए संयुक्त निरीक्षण अनिवार्य था, लेकिन नियमों का उल्लंघन करते हुए अकेले निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की गई। आरोप है कि बिना वास्तविक निरीक्षण के संतोषजनक टिप्पणियां दर्ज कर ऋण स्वीकृत किया गया तथा मशीनें स्थापित होने से पूर्व ही ऋण राशि जारी कर दी गई।
ईओडब्ल्यू ने आरोप लगाया कि सभी आरोपियों ने आपसी सांठगांठ कर बैंक को लगभग एक करोड़ 70 लाख रुपये की सदोष हानि पहुंचाई तथा स्वयं अवैध लाभ अर्जित किया। प्रकरण में आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7-सी के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
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