भोपाल , अक्टूबर 23 -- फर्जी फर्मों के बिलों के जरिए अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने और शासन को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप से जुड़े जीएसटी घोटाले में विशेष एसटीएफ अदालत ने पांच कारोबारियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। भोपाल जिला न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश सचिन जैन की अदालत ने आरोपी आनंद शर्मा, रघुवीर साहू, प्रमोद गुप्ता, गौरव कुमार गुप्ता और प्रीति बुंदेला के आवेदनों पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।
एसटीएफ ने जमानत आवेदनों का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि पांचों आरोपी श्रेणी-सी के लाभार्थी क्रेता हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी बिलों के आधार पर अवैध आईटीसी का लाभ लिया। मामले में डिजिटल जीएसटी डेटा, एचडीएफसी और एक्सिस बैंक के विवरण तथा सह-आरोपियों के बयानों सहित अन्य साक्ष्य सामने आए हैं।
यह मामला एसटीएफ थाना भोपाल के अपराध क्रमांक 02/2024 से संबंधित है। एसटीएफ के मुताबिक, आरोपियों को वर्ष 2024 में दंड प्रक्रिया से संबंधित धारा 41(1) के तहत नोटिस जारी किए गए थे। विवेचना पूरी होने के बाद चालान पेश करने की कार्रवाई के संबंध में वर्ष 2026 में भी नोटिस दिए गए। जांच एजेंसी ने 24 अक्टूबर 2026 को न्यायालय में चालान प्रस्तुत किए जाने की जानकारी दी थी। गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए आरोपियों ने अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर की थीं।
एसटीएफ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रकरण में कुल 40 आरोपियों की भूमिका सामने आई है, जिन्हें कथित भूमिका के आधार पर पांच श्रेणियों में बांटा गया है। श्रेणी-ए में फर्जी फर्म बनाने और अवैध आईटीसी आगे हस्तांतरित करने के कथित मुख्य आरोपी हेमंत मूलानी और दीपेश मंगलानी शामिल हैं। श्रेणी-बी में वे लोग हैं, जिनके दस्तावेजों का कथित तौर पर फर्जी फर्मों के पंजीयन में इस्तेमाल किया गया। श्रेणी-सी में फर्जी बिल खरीदकर आईटीसी का लाभ लेने के आरोपी कारोबारी, श्रेणी-डी में कमीशन पर फर्जी बिल उपलब्ध कराने वाले कथित बिचौलिये और श्रेणी-ई में जीएसटी वसूलने के बाद सरकारी खाते में कर जमा नहीं करने के आरोपी शामिल हैं। एसटीएफ ने मामले को वित्तीय अनियमितताओं और कथित कर चोरी से जुड़ा बताते हुए डिजिटल तथा बैंकिंग साक्ष्यों का हवाला दिया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पांचों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं निरस्त कर दीं।
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