सेंट्रल नोएडा , अगस्त 12 -- उत्तर प्रदेश में सेंट्रल नोएडा जोन स्थित बिसरख थाना पुलिस ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिकारी बनकर एक जीएसटी कंसल्टेंट को फर्जी ई-वे बिल सत्यापन और इस मामले में जेल भेजने की धमकी देकर 29 लाख रुपये वसूलने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने बुधवार को संवाददाताओं को यह जानकारी देते हुए बताया कि घटना 20 जुलाई की है। पीड़ित जीएसटी कंसल्टेंट अपने आवासीय सोसायटी से पालतू कुत्ते और लैपटॉप के साथ कार से निकले थे। इसी दौरान एस एस्पायर सोसायटी के पास कार सवार आरोपियों ने उनकी कार के आगे अपनी गाड़ी लगा दी।
आरोपियों ने खुद को जीएसटी अधिकारी बताया और पीड़ित को दो फर्मों/कंपनियों के नाम बताते हुए उनके फर्जी ई-वे बिल और सत्यापन से जुड़ा मामला बताया। इसके बाद जीएसटी से संबंधित कार्रवाई और जेल भेजने की धमकी देकर पीड़ित को कथित तौर पर ब्लैकमेल किया गया।
आरोपियों ने पीड़ित से 29 लाख रुपये नकद की मांग की। रकम मिलने तक आरोपी पीड़ित को उसकी ही कार में इधर-उधर घुमाते रहे। बाद में पीड़ित का भाई 29 लाख रुपये नकद लेकर आया, जिसके बाद आरोपियों ने पीड़ित को उसकी कार सहित छोड़ दिया और अपनी कार से वहां से फरार हो गए।
घटना के संबंध में पीड़ित की तहरीर पर बिसरख थाना में संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया। मामले के खुलासे के लिए पुलिस ने सर्विलांस, सीसीटीवी कैमरों और लोकल इंटेलिजेंस की मदद ली। जांच के दौरान पुलिस ने गिरोह के पांच आरोपियों को जलपुरा रोड स्थित स्कॉन मंदिर के पास से गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान कशिश चौहान उर्फ ईशू, राजेश पवार, विवेक शर्मा, अंकित शाही और अंशुल के रूप में हुई है।
आरोपियों के कब्जे से पीड़ित से वसूली गई रकम में से 24 लाख 50 हजार रुपये नकद चार लाख 50 हजार रुपये के सोने की चेन, चांदी का कड़ा और अंगूठी बरामद किए गए हैं। इस तरह पुलिस ने कुल 29 लाख रुपये की शत-प्रतिशत बरामदगी का दावा किया है।
इसके अलावा आरोपियों के पास से दो कारें, सात मोबाइल फोन, पुलिस सब इंस्पेक्टर की एक जोड़ी वर्दी और दिल्ली सिविल डिफेंस के लोगो वाली वर्दी, डोरी और बेल्ट भी बरामद किए गए हैं।
जांच में पुलिस के सामने एक अहम तथ्य भी आया है। पीड़ित और मामले का मुख्य आरोपी कशिश उर्फ ईशू चौहान पहले से एक-दूसरे को जानते थे। जांच के दौरान सामने आया कि पीड़ित जीएसटी कंसल्टेंट के तौर पर काम करते हुए जीएसटी से संबंधित बिलों में कथित हेरफेर के मामले में विभाग द्वारा जारी नोटिस के निस्तारण के सिलसिले में वर्ष 2021 से कशिश चौहान के संपर्क में आया था।इसी दौरान कशिश को पीड़ित के काम और उसकी गतिविधियों की जानकारी हुई।
पूछताछ में मुख्य आरोपी कशिश चौहान ने कथित तौर पर बताया कि उसे जानकारी थी कि पीड़ित जीएसटी अभिलेखों और बिलों में हेरफेर करके मोटा मुनाफा कमाता है। आरोपियों ने इसी कथित कमजोरी का फायदा उठाकर उससे बड़ी रकम हड़पने की योजना बनाई।
आरोपियों ने पहले पीड़ित की गतिविधियों की रेकी की। 20 जुलाई को योजना के तहत पीड़ित की ग्रैंड विटारा कार को रोककर आरोपी उसकी कार में सवार हो गए।
कशिश उर्फ ईशू चौहान ने पुलिस सब इंस्पेक्टर की वर्दी पहन रखी थी। पीड़ित को कार की पिछली सीट पर बैठाया गया, जबकि आरोपी अलग-अलग सीटों पर बैठकर उस पर दबाव बनाते रहे। इस दौरान एक आरोपी ने खुद को जीएसटी अधिकारी बताया।
आरोपियों ने पीड़ित को जीएसटी की धनराशि वसूलने और जीएसटी मामले में जेल भेजने की धमकी दी। इसी दबाव में पीड़ित ने रकम देने के लिए सहमति जताई। इसके बाद उसके फोन के जरिए पैसे की व्यवस्था कराई गई। पीड़ित के पालतू कुत्ते को एक्सप्रेस-वे पर एक अन्य साथी को सौंप दिया गया था। इसके बाद आरोपी पीड़ित को उसकी ही कार में घुमाते रहे और उसके भाई द्वारा 29 लाख रुपये कैश लाए जाने के बाद उसे छोड़ दिया।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि घटना में शामिल कोई भी आरोपी पुलिसकर्मी नहीं है। हालांकि जांच में सामने आया कि कुछ आरोपी सरकारी/सुरक्षा संबंधी सेवाओं से जुड़े रहे हैं।
मुख्य आरोपी कशिश उर्फ ईशू चौहान यशोभूमि, द्वारका, दिल्ली में (ड्राइवर कम पंप ऑपरेटर) के पद पर कार्यरत है। आरोपी राजेश पंवार दिल्ली सिविल डिफेंस से जुड़ा हुआ है। आरोपी विवेक शर्मा एस्कोर्ट, मानेसर-बल्लभगढ़ में (ड्राइवर कम पंप ऑपरेटर) के पद पर कार्यरत रहा है।
वहीं आरोपी अंकित सलारपुर में लोहे की ग्रिल और गेट बनाने का काम करता है और घटना में इस्तेमाल एक्सएल सिक्स वाहन का मालिक बताया गया है। आरोपी अंशुल दिल्ली में प्रॉपर्टी का काम करता है।पुलिस अब आरोपियों के आपराधिक इतिहास और गिरोह से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
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