वाराणसी , जून 20 -- खाद्य कारोबारियों के उत्पीड़न और अवैध वसूली के लिए फर्जी खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनकर की जाने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सख्त कदम उठाया है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार अब विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी विभागीय पहचान पत्र (आईडी कार्ड) धारण कर ही निरीक्षण, सैंपलिंग तथा खाद्य प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई कर सकेंगे।
शनिवार को सिगरा स्थित एक मैरिज प्वाइंट में खाद्य व्यापार मंडल वाराणसी द्वारा आयोजित बैठक में अध्यक्ष गौरव राठी ने व्यापारियों को संबोधित करते हुए इस आदेश की जानकारी दी। उन्होंने सभी सदस्यों से अपील की कि बिना विभागीय पहचान पत्र दिखाए निरीक्षण करने वाले व्यक्तियों को किसी प्रकार का सहयोग न दें। राठी ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग तथा खाद्य सुरक्षा आयुक्त का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय व्यापारिक समुदाय के लिए राहतकारी सिद्ध होगा।
व्यापारिक संगठनों का मानना है कि विभाग की यह पहल खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनाएगी तथा वास्तविक अधिकारियों और फर्जी तत्वों के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित करेगी। इससे विभागीय कार्रवाई की विश्वसनीयता बढ़ेगी और खाद्य कारोबारियों का प्रशासनिक तंत्र पर भरोसा भी मजबूत होगा।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि खाद्य संवर्ग के सभी राजकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को विभागीय पहचान पत्र उपलब्ध करा दिए गए हैं। किसी भी खाद्य प्रतिष्ठान, होटल, रेस्टोरेंट, किराना दुकान, मिठाई की दुकान अथवा अन्य खाद्य कारोबार से जुड़े संस्थानों में निरीक्षण के दौरान अधिकारी के लिए अपना पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य होगा।
निर्देशों में यह भी कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग का अधिकारी या कर्मचारी बताकर निरीक्षण करता है, लेकिन विभागीय पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाता है, तो उसे विभाग का अधिकृत अधिकारी नहीं माना जाए। ऐसे व्यक्तियों को किसी भी प्रकार का सहयोग न देने की सलाह दी गई है।
फर्जी अधिकारियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था भी की है। ऐसे मामलों की तत्काल सूचना संबंधित जिले के जिलाधिकारी को देने के साथ ही मुख्यालय के व्हाट्सएप नंबर 9793429747 तथा ई-मेल fdaupgov@gmail.com पर भी भेजी जा सकती है। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से फर्जी निरीक्षण और अवैध वसूली की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
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