नयी दिल्ली , अक्टूबर 14 -- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि देश में बिना मानक के कुकुरमुत्तों की तरह खुल रहे निजी कृषि कॉलेजों और फर्जी डिग्रियों पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी और इसके नियमन हेतु जल्द ही कृषि परिषद का गठन किया जाएगा।
श्री चौहान ने यहां एग्रीविज़न के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि किसी को भी सिर्फ फीस लेकर डिग्री बांटने की दुकान चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि बीएससी (कृषि) और एमएससी (कृषि) जैसी तकनीकी डिग्रियों का पूरा मान रहे और वे व्यर्थ न जाएं।
श्री चौहान ने कृषि शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने पर जोर देते हुए कहा कि नीति-निर्माण में छात्र और किसान संगठनों की विशेषज्ञता सबसे अहम है। उन्होंने अधिवेशन में उपस्थित विशेषज्ञों और छात्रों से आह्वान किया, "आप इस राष्ट्रीय अधिवेशन में गहन मंथन कीजिए और निष्कर्ष रूपी अमृत निकालिए, उसे देशहित में बांटने और लागू करने का काम सरकार करेगी।"उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि अधिवेशन के निष्कर्षों पर विस्तृत कार्ययोजना बनाने के लिए वे अगले 15 दिनों से एक महीने के भीतर प्रतिनिधियों के साथ दोबारा बैठक करेंगे, जिसमें कम समय और अधिक समय लेने वाली योजनाओं पर सीधा काम होगा।
उन्होंने कहा कि किसानों की आजीविका को और बेहतर बनाने के साथ ही भारत अब केवल अपना पेट भरने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में पूरी दुनिया का 'फूड बास्केट' बनकर उभरेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज किसानों के परिश्रम और आधुनिक नीतियों के दम पर देश खाद्यान्न में पूरी तरह आत्मनिर्भर है। वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश की कुल कृषि पैदावार 49 प्रतिशत बढ़ी है। देश चावल पैदावार और निर्यात में दुनिया में पहले और गेहूं में दूसरे स्थान पर है। अब समस्या पैदावार की नहीं, बल्कि उसके वैज्ञानिक भंडारण, प्रबंधन और वैश्विक निर्यात की है।
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