देहरादून , जून 24 -- उत्तराखंड पुलिस ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की फर्जी इंस्टाग्राम आईडी बनाकर लोगों के साथ ठगी करने और भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप में बुधवार को एक युवक को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी ने एआई की डीप फेक तकनीक के इस्तेमाल से वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का भ्रामक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।
उत्तराखंड पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजय सिंह ने बताया कि अज्ञात व्यक्ति इंस्टाग्राम पर लोक सेवक उत्तराखण्ड पुलिस होने का नाटक करता था। वह फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट पर डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग कर भ्रामक सामग्री फैला रहा था।
आरोपी के खिलाफ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 204, 221, 336, 356 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(सी) के तहत मामला दर्ज किया गया।
एसएसपी सिंह ने बताया कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मामले को तेजी से निपटाने के दिशानिर्देश दिये गये। साइबर क्राइम पुलिस ने मोबाइल नेटवर्क कंपनियों और मेटा से पत्राचार कर डेटा प्राप्त किया गया। इसके विश्लेषण से आरोपी की पहचान की गयी और क्लेमेन्टाउन क्षेत्र में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
उन्होंने बताया कि पूछताछ में अभियुक्त ने स्वीकार किया कि उसने उत्तराखंड पुलिस 112 नाम से फर्जी इंस्टाग्राम आईडी बनाकर चलायी और राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की फोटो का एआई/डीपफेक तकनीक के माध्यम से वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।
एसएसपी ने बताया कि अभियुक्त ने यह भी स्वीकार किया कि वह पुलिस की वर्दी पहनकर फोटो एवं वीडियो बनाकर लोगों पर प्रभाव जमाने तथा सोशल मीडिया पर लोकप्रियता एवं आर्थिक लाभ प्राप्त करने की कोशिश करता था। उन्होंने बताया कि उक्त अभियुक्त लुकमान मलिक देहरादून के क्लेमेन्टाउन के मोरोवाला का रहने वाला है और उसकी उम्र 20 वर्ष है। आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ, जिसमें उक्त फर्जी इंस्टाग्राम आईडी लॉग-इन पायी गयी।
पुलिस के अनुसार, मोबाइल की जांच में एआई जनरेटेड वीडियो, पुलिस वर्दी में अभियुक्त की फोटो तथा फर्जी पुलिस पहचान पत्र की फोटो भी मिली। आरोपी के घर से उत्तराखण्ड पुलिस पैटर्न से मिलते-जुलते वस्त्र एवं अन्य सामग्री भी बरामद की गयी। उन्होंने बताया कि लोक सेवक उत्तराखण्ड पुलिस का प्रतिरूपण करने, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट चलाने और एआई का दुरुपयोग कर भ्रामक सामग्री फैलाने के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर विधिक प्रावधानों के तहत आरोपी को गिरफ्तार किया गया। बरामद सामग्री को नियमानुसार जब्त कर आगे की कार्यवाही की जा रही है।
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