चंडीगढ़ , जून 04 -- विश्व पर्यावण दिवस की पूर्व संध्या पर पर्यावरण संरक्षण विषय पर गुरुवार को फरीदाबाद स्थित अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा आयोजित एक जन जागरूकता कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ पुरोहित ने कहा कि दूषित पेयजल की वजह से बुखार, टायफाइड समेत कई अन्य गंभीर बीमारी होती है।

इसी तरह धूल भरी हवा में अधिक समय तक रहने की वजह से फेफड़े की गंभीर बीमारी हो सकती हैं। वायु प्रदूषण सांस की बीमारी की बड़ी वजह है।

डॉ पुरोहित ने कहा कि दुनियाभर के देशों में प्रदूषण का आकलन करने वाली संस्था आईक्यू एयर की 2021-रिपोर्ट के अनुसार फरीदाबाद दुनिया का बारहवां सबसे प्रदूषित शहर है। उन्होंने बताया कि फरीदाबाद में प्रदूषण बढ़ने का सबसे बड़ा कारण सड़कों पर उड़ती हुई धूल है। इसके अलावा गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, इंडस्ट्री से निकलने वाला धुआं, कूड़े के ढेरों में लगने वाली आग भी प्रदूषण के मुख्य कारण हैं। उन्होंने चेताया कि बदले पर्यावरण का सीधा असर दिल की सेहत पर पड़ता है। बढ़ते तापमान और लू के कारण दिल से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं, जिससे लोगों को दिल के दौरे और स्ट्रोक होने का खतरा हमेशा बना रहता है।

डॉ पुरोहित ने कहा कि पर्यावरण का सेहत से सीधा संबंध है। ऐसे में पर्यावरण जितना अच्छा होगा, सेहत भी उतनी अच्छी होगी। उन्होंने कहा कि ओपीडी में आने वाले 40 प्रतिशत से अधिक मरीज पेट दर्द, सांस और आंख की बीमारी वाले होते हैं। पर्यावरण को स्वच्छ रखकर इन बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है। सांस, फेफड़े, पेट की सामान्य बीमारी से लेकर टीबी और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों की एक बड़ी वजह प्रदूषण है। साफ पानी, हवा और सफाई हो तो अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या करीब 40 फीसदी कम हो सकती है। फैक्ट्रियों के आसपास रहने वाले परिवारों को आंख में जलन, सांस लेने में तकलीफ होने जैसी परेशानी होती है।

विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान में पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीरता आयी है और पौधरोपण के महत्व के प्रति लोग जागरूक हुए हैं। घरों में इनडोर प्लांट का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। खासकर कोरोना महामारी के बाद ऑक्सीजन देने वाले पौधों को लोग घरों में लगा रहे हैं। छत पर बागवानी भी धीरे-धीरे बढ़ रही है।

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