लखीसराय , नवंबर 02 -- नता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने सोमवार को कहा कि वर्ष 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि बिहार के हित में नहीं है और इसका भविष्य में नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। श्री झा ने कहा कि भविष्य में यदि इस संबंध में कोई नई संधि होती है तो उसमें वर्ष 2050 तक बिहार की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

श्री झा ने आज लखीसराय में जदयू के 'फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद' कार्यक्रम के तीसरे चरण का शुभारंभ करते हुए कहा कि फरक्का जल संधि के कारण बिहार का जल प्रबंधन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और राज्य के लोग गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। शुष्क मौसम में गंगा के साथ-साथ बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जाता है। इससे किसानों की सिंचाई, लोगों के पेयजल, उद्योगों की जरूरतों और लाखों लोगों की आजीविका पर असर पड़ रहा है।

जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बिहार और केंद्र की तत्कालीन सरकारों ने इस संधि के दौरान राज्य के हितों की अनदेखी की। उन्होंने कहा कि संधि करते समय बिहार के किसानों, आम लोगों और युवाओं के भविष्य का ध्यान नहीं रखा गया। बिहार की जल आवश्यकताओं को नजरअंदाज कर लिया गया फैसला राज्य के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है।

श्री झा ने कहा कि गंगा बिहार में बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जदयू ने इस जनजागरूकता अभियान की शुरुआत पांच सितंबर को बक्सर से की थी। अभियान का समापन चार नवंबर को कटिहार में होगा। पहले चरण में बक्सर, भोजपुर, बेगूसराय और खगड़िया तथा दूसरे चरण में सारण, वैशाली, समस्तीपुर और पटना में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। तीसरे चरण की शुरुआत लखीसराय से हुई है। इसके बाद मुंगेर, भागलपुर और कटिहार में कार्यक्रम होंगे।

इस अवसर पर जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि फरक्का बराज और फरक्का जल संधि से बिहार को दोहरा नुकसान हो रहा है। उनके अनुसार, फरक्का बराज के कारण गंगा में गाद जमा होने से नदी का तल ऊंचा हो गया है, जिससे हर साल बाढ़ की समस्या पैदा होती है। वहीं, जल संधि के कारण बिहार को अपने हिस्से का पानी भी बांग्लादेश को देना पड़ता है, जिससे राज्य के कई जिलों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संधि का बोझ अकेले बिहार को उठाना पड़ रहा है।

श्री कुशवाहा ने संसद में इस मुद्दे को उठाने और इसे राष्ट्रीय विमर्श का विषय बनाने के लिए श्री झा को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार के साथ बिहार के हितों और जल आवश्यकताओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

कार्यक्रम में विधायक रामानंद मंडल और जदयू जिलाध्यक्ष रामानुज शर्मा ने कहा कि पार्टी का यह अभियान किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि बिहार के हक और जनसरोकार से जुड़ा है। इसके माध्यम से लोगों को फरक्का जल संधि के संभावित प्रभावों की जानकारी दी जा रही है और बिहार की आवाज केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम में पार्टी की ओर से तैयार डॉक्यूमेंट्री फिल्म प्रदर्शित की गई और फरक्का जल संधि से संबंधित विस्तृत जानकारी वाले पर्चे भी वितरित किए गए। इस मौके पर बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।

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