भागलपुर , नवंबर 03 -- जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने फरक्का जल संधि को बिहार के हितों के प्रतिकूल बताते हुए इसके नवीनीकरण का विरोध किया है।
श्री झा ने कहा कि वर्ष 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई इस संधि पर पुनर्विचार जरूरी है। यदि भविष्य में कोई नई संधि होती है तो उसमें वर्ष 2050 तक बिहार की जल आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
जदयू नेता ने मंगलवार को भागलपुर के टाउन हॉल में आयोजित 'फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि फरक्का जल संधि के कारण बिहार का जल प्रबंधन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और राज्य गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है।
उन्होंने कहा कि शुष्क मौसम में गंगा में पानी की उपलब्धता कम होने के बावजूद बांग्लादेश को निर्धारित मात्रा में पानी देना पड़ता है, जिससे बिहार के हितों को नुकसान पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि संधि के प्रावधानों के अनुसार एक जनवरी से 31 मई तक शुष्क मौसम में जब बक्सर के पास गंगा का प्रवाह घटकर महज 400 क्यूमेक (करीब 14 हजार क्यूसेक) रह जाता है, तब भी फरक्का से बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूमेक (करीब 53 हजार क्यूसेक) पानी छोड़ना पड़ता है। इसका अर्थ है कि केवल गंगा ही नहीं, बल्कि बिहार की आंतरिक नदियों का पानी भी खींचकर बांग्लादेश को दिया जा रहा है। यह बिहार के अधिकारों की अनदेखी है।
श्री झा ने कहा कि तत्कालीन केंद्र और बिहार सरकारों ने संधि के समय राज्य के हितों का समुचित ध्यान नहीं रखा। इसके परिणामस्वरूप किसानों की सिंचाई, लोगों के पेयजल, उद्योगों की जरूरतों, लाखों लोगों की आजीविका और युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित