दरभंगा , सितंबर 11 -- जनता दल (यूनाइटेड) ने फरक्का (गंगा) जल संधि को बिहार के हितों के प्रतिकूल बताते हुए इसके नवीनीकरण का विरोध किया है।जदयू की ओर से शुक्रवार को जिला मुख्यालय में जदयू के विधायक प्रोफेसर विनय कुमार चौधरी एवं ईश्वर मंडल ने संयुक्त रूप से आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वर्ष 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि से बिहार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने हाल में संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा था कि संधि का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए और यदि कोई नई संधि होती है तो उसमें वर्ष 2050 तक बिहार की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।उन्होंने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में ''फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद'' कार्यक्रम चलाया जा रहा है। अभियान का शुभारंभ पांच सितंबर को बक्सर से हुआ और इसका समापन कटिहार में होगा। बक्सर से बिहार में गंगा के प्रवेश तथा कटिहार से राज्य से निकलने के कारण इन दोनों स्थानों को अभियान के क्रम में जोड़ा गया है।
जदयू नेताओं ने कहा कि संधि के तहत 1 जनवरी से 31 मई तक शुष्क मौसम में बक्सर के पास गंगा का प्रवाह महज 400 क्यूसेक तक रह जाने पर भी फरक्का से बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूसेक पानी छोड़ना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि इसके कारण बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जा रहा है, जो बिहार के साथ सीधे तौर पर हकमारी है।
उन्होंने कहा कि फरक्का बराज के कारण गंगा में भारी गाद जमा होने से नदी का तल ऊंचा हुआ है, जिसके कारण उत्तर बिहार को प्रत्येक वर्ष बाढ़ का सामना करना पड़ता है। वहीं, शुष्क मौसम में जल संधि के कारण बिहार के हिस्से का पानी बांग्लादेश को दिए जाने से राज्य के कई जिलों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस जल संधि का 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा है। इससे किसानों की सिंचाई, लोगों के पेयजल, उद्योगों की जल आवश्यकता, लाखों लोगों की आजीविका और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
पार्टी के विधायको ने कहा कि ''फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद'' अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। यह पहल किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि बिहार के हक और बिहारवासियों के हित से जुड़ा जनसरोकार है। पार्टी का उद्देश्य फरक्का जल संधि से बिहार को हो रहे नुकसान के बारे में जन-जागरूकता पैदा करना और बिहार की आवाज केंद्र तक पहुंचाना है, जिससे गंगा से जुड़े सवाल राष्ट्रीय विमर्श का विषय बनें और फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार हो।
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