नासिक , अक्टूबर 21 -- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार, राज्य मंत्रिमंडल के अन्य मंत्रियों तथा गणमान्य व्यक्तियों के साथ नयी दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

उन्होंने राष्ट्रपति को 31 अक्टूबर को नासिक और त्र्यंबकेश्वर में 'सिहंस्थ कुंभ मेले' के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। मुलाकात के दौरान, मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को समारोह में औपचारिक रूप से आमंत्रित किया और उन्हें एक विशेष उपहार भेंट किया। इस भेंट में महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपराओं, जनजातीय उद्यमिता, वस्त्र-शिल्प, कृषि उत्पादों और खान-पान की खासियतों की झलक मिलती है।

राष्ट्रपति को 31 अक्टूबर को होने वाले कई कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए भी आमंत्रित किया गया। इन कार्यक्रमों में गोदावरी नदी के तट पर गोदा आरती, नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट की शुरुआत, कुंभ मेला गीत का अनावरण, इस आयोजन पर आधारित एक कॉफी-टेबल बुक का विमोचन और एक स्मारक डाक टिकट जारी करना शामिल है।

इस दौरान कई मंत्रियों समेत मंडलायुक्त और सिंहस्थ कुंभ मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण गेदम तथा कुंभ मेला आयुक्त शेखर सिंह के साथ-साथ अन्य अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। निमंत्रण को एक अनोखे कलात्मक रूप में डिजाइन किया गया है जो सिंहस्थ कुंभ मेला की आध्यात्मिक महत्व एवं भव्यता को दर्शाता है। जब निमंत्रण बॉक्स खोला जाता है तो एक त्रि-आयामी पॉप-अप दृश्य सामने आता है जो कार्यक्रम की पौराणिक पृष्ठभूमि एवं धार्मिक महत्व को दर्शाता है।

निमंत्रण और उपहारों का यह संग्रह महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विविधता एवं आध्यात्मिक विरासत को दर्शाता है और इसके साथ ही आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए नासिक और त्र्यम्बकेश्वर की तैयारियों को भी उजागर करता है।

महाराष्ट्र के सत्ताधारी गठबंधन के तीन प्रमुख नेताओं का राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने का मकसद एक ऐतिहासिक धार्मिक उत्सव में राष्ट्रीय नेतृत्व को आमंत्रित करने के साथ-साथ राज्य मंत्रिमंडल में अभी तक आवंटित न किए गए विभागों खासकर वित्त मंत्रालय को लेकर गठबंधन में चल रहे भारी तनाव को सुलझाना भी था।

राष्ट्रपति के निमंत्रण पर एकजुटता दिखाने के बावजूद, राजधानी के इस दौरे के दौरान पर्दे के पीछे से अलग-अलग राजनीतिक हलचल भी देखी गईं। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार अपने साथियों से पहले ही दिल्ली पहुंची और अपने बेटे पार्थ पवार के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से एक उच्च-स्तरीय, स्वतंत्र बैठक की। इस खींचतान की मुख्य वजह अहम मंत्री पदों का बंटवारा माना जा रहा है।

महायुति गठबंधन बनने के बाद से ही, महत्वपूर्ण वित्त विभाग राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पास रहा और उस समय के उपमुख्यमंत्री अजित पवार वित्त तथा योजना विभाग संभाल रहे थे। हालांकि, जनवरी 2026 में एक विमान दुर्घटना में उनकी मौत के बाद, मुख्यमंत्री फडणवीस ने वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया। भले ही श्रीमती पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया लेकिन वित्त विभाग मुख्यमंत्री फडणवीस के पास है।

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