मुंबई , जुलाई 21 -- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बिना अनुमति और बिना नेतृत्व वाले आंदोलनों के खिलाफ कड़ा रूख अपनाते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक अधिकारों और जानबूझकर पैदा की गयी अराजकता के मामले में एक स्पष्ट विभाजक रेखा है और इसकी आड़ में "किसी भी हिंसा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।"श्री फडणवीस ने दिल्ली में हुये प्रदर्शनों से उपजे हालिया तनाव पर बात करते हुये कहा कि संविधान शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है, लेकिन इसके साथ कुछ जिम्मेदारियां भी जुड़ी हैं। उन्होंने कहा, "शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगने वालों को प्रशासन पूरा सहयोग देगा। बिना अनुमति वाले प्रदर्शनों, हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की सोची-समझी कोशिशों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।"श्री फडणवीस ने बिना नेतृत्व या 'बिना चेहरे वाले' आंदोलनों की तीखी आलोचना की और आरोप लगाया कि स्वार्थी तत्व और राजनीतिक संगठन अक्सर अपने छिपे हुये मकसद को पूरा करने के लिए आम जनता के मंचों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा, "सभी प्रदर्शनकारियों की नीयत खराब नहीं होती। कई लोग वास्तविक चिंताओं के साथ प्रदर्शनों में शामिल होते हैं। इसके विपरीत कुछ तत्वों का ध्यान सिर्फ अराजकता फैलाने पर होता है। ऐसे तत्व अपने राजनीतिक फायदे के लिए नीट परीक्षा जैसे गैर-संबंधित मुद्दों का इस्तेमाल करते हैं।"हालिया झड़पों के दौरान पुलिस की ओर से की गयी कड़ाई का बचाव करते हुये श्री फडणवीस ने कहा कि बल प्रयोग आखिरी रास्ता था। उन्होंने कहा, "कोई भी सरकार अपने ही नागरिकों पर लाठीचार्ज का आदेश देकर खुश नहीं होती। जब स्थिति हाथ से निकलती दिख रही थी, तब पुलिस ने बहुत संयम दिखाया और किसी बड़ी घटना को रोकने के लिए केवल जरूरी कदम उठाये।"मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार बहुप्रतीक्षित कृषि ऋण माफी को लागू करने के अंतिम चरण में तेजी से आगे बढ़ रही है।
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