मुंबई , मार्च 25 -- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को विधानसभा में भारतीय न्याय संहिता (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया, जिसमें पहले पारित 'शक्ति अधिनियम' के प्रमुख प्रावधानों को नए आपराधिक कानून संरचना में शामिल करने का प्रस्ताव है।

महाराष्ट्र विधानसभा ने इस विधेयक को पारित कर दिया जिसमें डिजिटल माध्यमों से महिलाओं के यौन उत्पीड़न और एसिड अटैक पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा से संबंधित संशोधन शामिल किए गए, जैसा कि मूल रूप से शक्ति आपराधिक कानून (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक, 2020 में परिकल्पित था।

विधेयक पेश करते हुए श्री फडणवीस ने कहा कि विधानसभा ने पहले ही शक्ति अधिनियम को सर्वसम्मति से पारित कर केंद्र को भेज दिया था, जिसने चेतावनी दी थी कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के साथ इसे लागू करने से कानूनी अतिशयोक्ति हो सकती है।

बीएनएस के लागू होने के बाद, जिसमें शक्ति अधिनियम के अधिकांश प्रावधान पहले से ही शामिल हैं, राज्य सरकार ने पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया ताकि कमियों की पहचान की जा सके। समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने छूटे हुए प्रावधानों का समाधान करने के लिए दो महत्वपूर्ण राज्य-विशिष्ट संशोधन प्रस्तावित किए।

वर्तमान में कानून बलात्कार पीड़ितों की पहचान उजागर करने पर रोक लगाता है। एक संशोधन का उद्देश्य दुष्कर्म पीड़ितों पर लागू पहचान गुप्त रखने संबंधी मौजूदा कानूनी सुरक्षा को एसिड हमलों से बचे लोगों तक विस्तारित करना है, ताकि उनकी पहचान भी सुरक्षित हो सके। दूसरे प्रावधान में महिलाओं को निशाना बनाकर की जाने वाली ऑनलाइन मानहानि के मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव है जिसमें ऐसे कृत्यों को केवल सामान्य मानहानि के रूप में मानने के बजाय यौन अपराधों के दायरे में लाया जाएगा, जिसमें यौन उत्पीड़न की श्रेणियां भी शामिल होंगी। अगर किसी महिला को डिजिटल मीडिया के माध्यम से बदनाम किया जाता है, तो ऐसे कृत्यों को अब सामान्य मानहानि के बजाय यौन अपराध, बलात्कार या यौन उत्पीड़न की विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाएगा।

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