मुंबई , अगस्त 06 -- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुनबी जाति प्रमाणपत्रों को रद्द करने की प्रक्रिया में राज्य सरकार के हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रमाणपत्रों का सत्यापन और निरस्तीकरण उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार जाति सत्यापन समितियां स्वतंत्र रूप से करती हैं।
श्री फडणवीस ने मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल द्वारा लगाये गये आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने उनका पूरा बयान नहीं सुना है, लेकिन यह स्पष्ट किया कि एक बार जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति के समक्ष प्रस्तुत हो जाने के बाद उसके सत्यापन या निरस्तीकरण में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं होती।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष लगभग 10 से 12 प्रतिशत जाति प्रमाणपत्र पर्याप्त दस्तावेजों के अभाव या निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने के कारण निरस्त कर दिये जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल कुनबी प्रमाणपत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य श्रेणियों के प्रमाणपत्रों पर भी यही प्रक्रिया लागू होती है।
श्री फडणवीस ने कहा कि कोई भी मंत्री जानबूझकर सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करता। यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है तो उसे अपील करने का अधिकार है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वरिष्ठ अधिकारी यह जांच करेंगे कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं तथा आवेदकों को समिति द्वारा बताई गई कमियों को दूर करने का अवसर भी मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई नगरसेवकों और जिला परिषद सदस्यों के जाति प्रमाणपत्र भी निरस्त किए जा चुके हैं, जिससे स्पष्ट है कि यह प्रक्रिया सरकार से स्वतंत्र है।
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