कोलकाता , मई 03 -- पश्चिम बंगाल में मतगणना की पूर्व संध्या पर चुनाव आयोग (ईसीआई) ने मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा पुख्ता करने के लिए कई कड़े उपायों की घोषणा की है।
रविवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि प्रत्येक मतगणना केंद्र की सुरक्षा त्रि-स्तरीय होगी। हर केंद्र पर केंद्रीय बलों की लगभग दो कंपनियां तैनात रहेंगी।
श्री अग्रवाल ने कहा, "सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक या मतगणना केंद्रों के भीतर अनधिकृत सामग्री के प्रवेश की प्राथमिक जिम्मेदारी ड्यूटी पर तैनात केंद्रीय बलों की होगी।"पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए मतगणना सोमवार को राज्य भर के 77 केंद्रों पर की जायेगी।
चुनाव आयोग के एक अन्य अधिकारी के अनुसार, तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए आज रात पर्यवेक्षकों, जिला चुनाव अधिकारियों (डीईओ) और रिटर्निंग अधिकारियों (आरओ) के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की जायेगी।
मुख्य चुनाव अधिकारी ने यह भी बताया कि अधिकतर जिला अधिकारियों के साथ चर्चा हो चुकी है और जरूरत पड़ने पर मतगणना केंद्रों के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (निषेधाज्ञा) के तहत प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
हालांकि, विजय जुलूस निकालने की अनुमति पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है और इसे फिलहाल रोक कर रखा गया है। जिलाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मतगणना के दिन तनाव बढ़ने की आशंका रहती है। आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन से मशविरा करने के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जायेगा।
इस बीच 21 मई को फलता सीट पर होने वाले पुनर्मतदान के लिए उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा विशेष पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में बने रहेंगे या नहीं, इस पर अनिश्चितता बरकरार है।
चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा, "आयोग ने अभी इस पर कोई फैसला नहीं लिया है।"श्री अग्रवाल ने फलता की घटना पर कहा कि पारदर्शिता बनाये रखने के लिए वेबकास्टिंग के सभी फुटेज की समीक्षा चार मई को परिणाम घोषित होने के बाद की जायेगी। यदि किसी सरकारी अधिकारी की संलिप्तता पायी जाती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।
उन्होंने 2021 की मतगणना के दौरान बिजली कटौती की शिकायतों से सबक लेते हुए कहा कि इस बार जेनरेटर सहित बैकअप के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं। बिजली आपूर्ति कंपनियों के साथ समन्वय बैठकें की जा चुकी हैं और मतगणना के दौरान निर्बाध बिजली सुनिश्चित करने के लिए राज्य के ऊर्जा विभाग के साथ भी चर्चा तय है।
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