पटना , अप्रैल 25 -- बिहार के कटिहार जिले के मनसाही प्रखंड में स्थापित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई (पीडब्ल्यूएमयू) पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रोजगार सृजन की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरी है। बाढ़ और जल-जमाव वाले क्षेत्र में प्लास्टिक अपशिष्ट के अंबार से बढ़ रही पर्यावरणीय समस्या पर प्लास्टिक कचरा प्रबंधन इकाई की स्थापना से काफी हद तक रोकथाम हुई है।
कटिहार का मनसाही प्रखंड बाढ़ प्रभावित इलाका है। यहां परंपरागत रूप से जलाशयों की संख्या भी अधिक है। बाढ़ग्रस्त इलाका होने के कारण खेतों और अन्य जमीनों पर लंबे समय तक जलभराव की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में प्लास्टिक कचरा जलाशय और खेतों को प्रभावित कर रहा था। नालियों का जाम होना आम बात थी। प्लास्टिक कचरा खेतों की उर्वरता के लिए संकट का कारण बनता जा रहा था।
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए मनसाही में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)/ लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान अंतर्गत पीडब्ल्यूएमयू की स्थापना की गई। साथ ही प्रखंड के तहत आने वाले सभी पंचायतों से प्लास्टिक कचरे का नियमित उठाव सुनिश्चित किया गया। ग्रामीण विकास विभाग ने प्लास्टिक को जहां-तहां फेंकने के बजाय अलग से संग्रहित करने के प्रति लोगों को जागरूक किया। इसके बाद पंचायत स्तर से प्लास्टिक कचरे को एकत्र कर प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई (पीडब्ल्यूएमयू) में लाया जाने लगा।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्लास्टिक अपशिष्ट के संग्रहण के लिए दो स्थायी कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इन कर्मियों के हाथों संग्रहित प्लास्टिक कचरे से पहले धूल हटाकर बेलर मशीन से बंडल बनाया जाता है। इसके बाद श्रेडर मशीन से काटने के बाद प्लास्टिक अपशिष्ट को संग्रहित किया जाता है जो बाद में जैविक खाद और दूसरे उत्पाद बनाने के काम आ रहा है।
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