नयी दिल्ली , मार्च 21 -- प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने देश की प्रतिष्ठित और सबसे पुरानी समाचार एजेन्सियों में से एक यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया (यूएनआई) परिसर को खाली कराने के लिए पुलिस द्वारा वहां काम कर रहे पत्रकारों के साथ शुक्रवार देर शाम की गई धक्का-मुक्की तथा बल प्रयोग पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। प्रेस क्लब ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है।
पुलिस भूमि विवाद से संबंधित एक अदालत के आदेश के बाद सरकारी अधिकारियों के साथ देर शाम परिसर को खाली कराने के लिए वहां गयी थी।
प्रेस क्लब ने शनिवार को एक वक्तव्य जारी कर कहा कि वह पत्रकारों, जिनमें महिला कर्मी भी शामिल हैं, पर की गई इस तरह की कड़ी कार्रवाई की जोरदार शब्दों में निंदा करता है। वक्तव्य में कहा गया है कि पत्रकारों ने बताया है कि उन्हें दिल्ली पुलिस और "सीआरपीएफ कर्मियों" द्वारा बल प्रयोग करके उनके कार्यस्थल से हटाया गया और उन्हें अपने निजी सामान तक उठाने की अनुमति नहीं दी गई। वक्त्व्य में कहा गया है कि काम करने का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है। प्रेस क्लब ने एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा है कि वह इस मामले में प्रभावित पत्रकारों के साथ खड़ा है और यह मानता है कि अधिकारियों को संयम बरतना चाहिए था, विशेषकर जब काम कर रहे पत्रकारों ने उन्हें बताया था कि प्रबंधन ने अभी तक अदालत के आदेश के बाद परिसर खाली करने के लिए उन्हें सूचित नहीं किया था, जो पुलिस कार्रवाई शुरू होने से कुछ ही घंटे पहले आया था।
प्रेस क्लब ने वक्तव्य में कहा कि वह अधिकारियों से आग्रह करता है कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाए, क्योंकि इससे पत्रकार समुदाय में यह विश्वास मजबूत होगा कि काम करने का अधिकार लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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