बेंगलुरु , अप्रैल 24 -- कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री प्रियांक खरगे ने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में पहले चरण के चुनावों के दौरान मतदाताओं को उनके अधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया है।

श्री खरगे ने शुक्रवार को यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से लोकतांत्रिक भागीदारी कमजोर होती है। उन्होंने कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त ही वह व्यक्ति हैं जिन्होंने इन चीजों को अंजाम दिया है। जरा सोचिए, लाखों लोग जो इस राज्य के नागरिक हैं, इस देश के नागरिक हैं, उनके पास मत देने की कोई शक्ति नहीं है।"गौरतलब है कि मंत्री की ये टिप्पणियां इन दोनों राज्यों में चुनाव कराने के तरीके को लेकर बढ़ रही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच आई हैं। विपक्षी नेता चूकों के संबंध में चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

श्री खरगे ने चुनावी चिंताओं को शासन संबंधी चुनौतियों से जोड़ते हुए कहा कि कर्नाटक कैबिनेट भी आंतरिक आरक्षण के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा में लगी हुई है, जिस पर फिलहाल कानूनी जांच चल रही है। उन्होंने बताया कि आरक्षण की ऊपरी सीमा के साथ-साथ आंतरिक आरक्षण नीतियों के प्रारूप को चुनौती देते हुए कई मामले दायर किए गए हैं।

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