बेंगलुरु , जून 16 -- कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर हमला जारी रखते हुए संगठन की फंडिंग, कानूनी स्थिति और पारदर्शिता को सार्वजनिक करने की मांग की है।

श्री खरगे का यह नया हमला संघ प्रमुख मोहन भागवत के उसे रजिस्टर करने की मांग को खारिज करने के बाद आया है, जिसमें श्री भागवत ने संगठन के खुले तौर पर काम करने की बात करते हुए कहा कि उसके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। श्री खरगे ने मंगलवार को कहा कि कोई भी संस्था, चाहे वह कितनी भी पुरानी हो या उसका प्रभाव कुछ भी रहा हो, संवैधानिक लोकतंत्र में सार्वजनिक जिम्मेदारी से बचने का दावा नहीं कर सकती है।

उन्होंने कहा, "यह सोच दिखाती है कि सार्वजनिक जिम्मेदारी वैकल्पिक है और संगठन कानूनी जांच से ऊपर है। घमंड छोड़ो, कानून का पालन करो और अपने कार्यालय वाहक या अधिवक्ता को बुलाकर मुझे समझाओ।" मंत्री ने तर्क दिया कि संघ खुद को एक सांस्कृतिक संगठन बताता है लेकिन पूरे देश में इसका सामाजिक और राजनीतिक असर है।

श्री खरगे ने कहा कि संघ को एक सांस्कृतिक संगठन होने का पूरा हक है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा संघ को अपना वैचारिक अभिभावक स्वीकार करने की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह एक साथ बड़ा सामाजिक और राजनीतिक काम नहीं कर सकता है क्योंकि संघ खुद बार बार कहता है कि उसका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है और इसलिए उसकी कोई सार्वजनिक जवाबदेही नहीं है।

श्री खरगे ने दावा किया कि संघ भारत और विदेश में 2,500 से अधिक संगठनों के नेटवर्क के जरिए काम करता है, इस प्रणाली के जरिए धन लेता है और पूरे देश में इसके मुख्यालय और कार्यालय हैं। उन्होंने संगठन की जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि संघ प्रमुख को करदाताओं के पैसे से सुरक्षा प्रोटोकॉल मिलते हैं।

उन्होंने पूछा, "जनता को यह जानने का हक है कि क्या संगठन उन्हीं कानूनी मानकों का पालन करता है जिनकी उम्मीद बाकी सभी से की जाती है।" उन्होंने कहा कि औपचारिक कानूनी पहचान से इसकी स्थिति और कामकाज से जुड़े सवालों को हल करने में मदद मिलेगी।

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