बेंगलुरु , जून 22 -- कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने भाजपा पर खुद की सांगठनिक चुनौतियों से निपटने की बजाय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयानों को लेकर 'ज्यादा चिंतित' होने का आरोप लगाया है।
बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री प्रियांक खरगे ने कहा कि भाजपा की प्रतिक्रियाएं उसकी आंतरिक असुरक्षा और पार्टी के मामलों को ठीक से संभालने में उसकी नाकामी दर्शाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्री मल्लिकार्जुन खरगे को एआईसीसी अध्यक्ष और दशकों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ नेता होने के नाते कांग्रेस पार्टी के भीतर अनुशासन लागू करने का पूरा अधिकार है।
श्री प्रियांक खरगे की यह टिप्पणी रविवार 21 जून को बेंगलुरु में आयोजित 'संकल्प समावेश' कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं को श्री मल्लिकार्जुन खरगे की लगायी कड़ी फटकार की पृष्ठभूमि में आयी है। इस कार्यक्रम में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में नारे गूंजने के बाद कुछ देर के लिए व्यवधान पैदा हो गया था।
जब भीड़ का एक हिस्से ने 'डीके-डीके' के नारे लगाने शुरू कर दिये तो श्री मल्लिकार्जुन खरगे ने बेहद तल्ख लहजे में दखल दिया और सख्त चेतावनी दी। उन्होंने साफ किया कि यह कार्यक्रम पार्टी का है, न कि किसी व्यक्तिगत नेता का मंच।
व्यवस्था बनाने का प्रयास करते हुए श्री मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, "यह किसी व्यक्ति का कार्यक्रम नहीं है, यह पार्टी का कार्यक्रम है। यहां किसी व्यक्ति की पूजा नहीं होती। हम यहां पार्टी कार्यक्रम के लिए आये हैं, जो हम सभी को एक साथ लाता है।"उन्होंने एक सांगठनिक कार्यक्रम में इस तरह की नारेबाजी के पीछे की मंशा पर सवाल उठाये और इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस को व्यक्ति-केंद्रित राजनीति के बजाय सामूहिक अनुशासन पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि कार्यक्रम के फुटेज की समीक्षा करने के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार किया जायेगा।
श्री प्रियांक खरगे ने कांग्रेस अध्यक्ष के दखल का बचाव करते हुए कहा कि आंतरिक अनुशासन और सांगठनिक एकता बनाये रखने के लिए ऐसे कदम जरूरी थे। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष का अधिकार वरिष्ठ नेताओं से लेकर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं तक, सभी सदस्यों पर समान रूप से लागू होता है और इसमें कोई अपवाद नहीं है।
भाजपा पर तंज कसते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल को अपनी खुद की सांगठनिक स्थिरता से ज्यादा कांग्रेस के आंतरिक मामलों की चिंता है। उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी पार्टी अध्यक्ष को अपने विधायकों की वफादारी पक्की करने के लिए उन्हें मंदिरों में ले जाना पड़े तो यह पार्टी के भीतर आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है।
उन्होंने तीखे राजनीतिक लहजे में पिछले आरोपों का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना करने के भाजपा के नैतिक अधिकार पर भी सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि भाजपा को कांग्रेस के मामलों पर टिप्पणी करने के बजाय अपने आंतरिक अनुशासन पर ध्यान देना चाहिए।
ये टिप्पणियां कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच नेतृत्व के अधिकार, आंतरिक अनुशासन और पार्टी एकता को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी को और तेज करती हैं।
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