रांची , मई 06 -- झारखंड में धनबाद के चर्चित प्रिंस खान गिरोह के गिरफ्तार 'मास्टरमाइंड' मेजर ने तीन दर्जन से अधिक कांडों में संलिप्तता स्वीकारी की है।

धनबाद पुलिस ने उसे रिमांड पर ले कर लागातार पूछताछ कर रही हैल जिसमें उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। पुलिस के मुताबिक, मेजर गिरोह का 'टेक्निकल मास्टरमाइंड' था, जो रंगदारी वसूली से लेकर हथियार आपूर्ति और आर्थिक नेटवर्क तक पूरे सिस्टम को संचालित करता था।

पुलिस रिमांड के दौरान मेजर ने धनबाद जिले में दर्ज करीब तीन दर्जन आपराधिक मामलों में अपनी प्रत्यक्ष भूमिका स्वीकार की है। इसके अलावा कई अन्य घटनाओं में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होने की बात भी कबूल की है। व्यवसायियों, डॉक्टरों और ठेकेदारों से रंगदारी वसूलने के लिए गोलीबारी, बमबाजी और धमकी देने जैसी वारदातों को अंजाम देना गिरोह का मुख्य तरीका था। जांच में यह सामने आया है कि गिरोह का पूरा डिजिटल और आर्थिक नेटवर्क मेजर के जिम्मे था। इन सभी माध्यमों से वसूली की रकम सीधे प्रिंस खान तक पहुंचाई जाती थी।

पूछताछ के दौरान बड़ा खुलासा करते हुए मेजर ने बताया कि पुलिस दबाव बढ़ने के बाद प्रिंस खान दुबई से भागकर अवैध रूप से पाकिस्तान में शरण लिए हुए है। उसके प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ने की बात भी सामने आई है।

मेजर ने बताया कि पाकिस्तान जाने को लेकर उसका प्रिंस खान से मतभेद हो गया था, जिसके बाद उसे गिरोह से अलग कर दिया गया। उसकी जगह प्रिंस खान के रिश्तेदार आदिल को जिम्मेदारी दी गई।

पूछताछ में कई सनसनीखेज मामलों का भी जिक्र सामने आया - 2018: कुसुंडा फाटक के पास रंजीत सिंह हत्याकांड, 2021: लाला खान पर गोलीबारी, 2023: उपेंद्र सिंह की हत्या2024: मो. शहाबुद्दीन सिद्दिकी की हत्या, इसके अलावा शहर के कई प्रतिष्ठानों पर फायरिंग और बमबाजी की घटनाओं में भी उसकी संलिप्तता सामने आई है।

मेजर ने खुलासा किया कि गिरोह द्वारा कुछ मीडिया कर्मियों और सफेदपोश व्यक्तियों का इस्तेमाल भय का माहौल बनाने के लिए किया जाता था। पुलिस अब इन कनेक्शनों की जांच में जुट गई है।

पुलिस के पूछताछ में मेजर ने दावा किया कि प्रिंस खान नशे का आदी हो चुका है और मानसिक रूप से कमजोर है। उसने यह भी कहा कि गिरोह का संचालन वह खुद करता था, जबकि प्रिंस खान उस पर निर्भर रहता था।

गिरोह अब भी सक्रिय, कई सदस्य मैदान में: मेजर की गिरफ्तारी के बावजूद गिरोह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दुबई में रह रहे परिजन संचालन में जुटे हैं। भारत में भाई और रिश्तेदार सक्रिय हैं। वासेपुर और पांडरपाला के कुछ स्थानीय लोग सहयोग कर रहे हैं। हालांकि पुलिस की सख्ती के कारण गिरोह को नए शूटर नहीं मिल पा रहे हैं।

धनबाद पुलिस का कहना है कि मेजर से मिली जानकारी के आधार पर गिरोह के आर्थिक नेटवर्क, बैंक खातों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की गहन जांच जारी है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां व बड़े खुलासे होने की संभावना है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित