गौतमबुद्धनगर , अक्टूबर 12 -- उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्धनगर जिला निर्वाचन अधिकारी मेधा रूपम ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विधान परिषद मेरठ खंड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचन-2026 की घोषणा के बाद जनपद के समस्त प्रिंटिंग प्रेस स्वामियों को निर्वाचन संबंधी प्रचार सामग्री के मुद्रण एवं प्रकाशन के दौरान निर्धारित कानूनी प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन पंपलेट, पोस्टर और अन्य प्रचार सामग्री के मुद्रण में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। सभी प्रिंटिंग प्रेस स्वामियों को निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 127क के प्रावधानों के अनुरूप ही कार्य करना होगा।
सोमवार को कार्रवाई एवं प्रक्रिया के संबंध जिला निर्वाचन अधिकारी मेधा रूपम ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए प्रचार सामग्री के मुद्रण एवं प्रकाशन से संबंधित नियमों का अनुपालन आवश्यक है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 127क के अनुसार किसी भी निर्वाचन पंपलेट अथवा पोस्टर के मुख्य पृष्ठ पर उसके मुद्रक और प्रकाशक का नाम तथा पता स्पष्ट रूप से अंकित होना अनिवार्य है। जिस सामग्री पर यह विवरण दर्ज नहीं होगा, उसका मुद्रण या प्रकाशन नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि किसी निर्वाचन पंपलेट या पोस्टर को मुद्रित करने अथवा मुद्रित करवाने से पहले उसके प्रकाशक की पहचान से संबंधित घोषणा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्राप्त करना आवश्यक है। यह घोषणा प्रकाशक द्वारा हस्ताक्षरित होनी चाहिए और ऐसे दो व्यक्तियों से सत्यापित कराई जानी चाहिए, जो प्रकाशक को व्यक्तिगत रूप से जानते हों। प्रिंटिंग प्रेस संचालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्धारित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही निर्वाचन संबंधी प्रचार सामग्री का मुद्रण किया जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि किसी धर्म, वंश, जाति, समुदाय अथवा भाषा के आधार पर अपील करने वाली या विरोधी के चरित्र-हनन से संबंधित निर्वाचन सामग्री का मुद्रण नहीं किया जाए। निर्वाचन के दौरान प्रकाशित होने वाले पंपलेट और पोस्टर निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप होने चाहिए। प्रिंटिंग प्रेस स्वामियों की जिम्मेदारी है कि वे सामग्री के मुद्रण से पहले आवश्यक विवरण और घोषणाओं की जांच कर लें, ताकि नियमों का उल्लंघन न हो।
मुद्रक एवं प्रकाशक को मुद्रित सामग्री के प्रकाशन के तीन दिनों के भीतर उसकी चार प्रतियां, परिशिष्ट 'क' एवं 'ख' सहित, प्रकाशक से प्राप्त घोषणा के साथ जिला निर्वाचन कार्यालय में जमा करनी होंगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य निर्वाचन संबंधी प्रचार सामग्री के मुद्रण और प्रकाशन का रिकॉर्ड उपलब्ध रखना तथा नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करना है।
उन्होंने चेतावनी दी कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 127क की उपधारा-1 अथवा उपधारा-2 के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे उल्लंघन पर छह माह तक का कारावास, दो हजार रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।
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