रायपुर , जुलाई 23 -- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कांग्रेस मुख्यालय घेराव के दौरान हुए विवाद के बाद दर्ज प्राथमिकी को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। कांग्रेस ने कार्रवाई को सरकार की "फांसीवादी नीति" करार देते हुए राज्यपाल से शिकायत करने की घोषणा की है, जबकि भाजपा ने कांग्रेस पर हिंसा और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया है।
इसी बीच कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने गौरेला में पत्रकार वार्ता में पेपर लीक, राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे एवं चढावा चोरी और केंद्र-राज्य सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने गुरुवारको कहा, "कल सरकार के साथ भाजपा के लोगों ने राजीव भवन पर हमला बोला था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पथराव किया । पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर आंसू गैस के गोले छोड़े। कांग्रेस इसकी कड़ी निंदा करती है। हम इस मामले को लेकर राज्यपाल के पास जाएंगे। "कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद दुबे ने कहा, "भाजपा के नेताओं ने जूते-चप्पल और पत्थर फेंके लेकिन कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ ही प्राथमिकी दर्ज की गयी। यह फांसीवादी नीति है। कांग्रेस के दफ्तर में आकर मंत्रियों के द्वारा प्रदर्शन करना शोभा नहीं देता। उन्हाेंने आराेप लगाया कि भाजपा के लोग ट्रैक्टर में पत्थर भरकर लाए थे। सत्ता पक्ष होकर अपने गुंडों को लाकर कांग्रेस भवन में पत्थर फेंका गया। कांग्रेस नेताओं के ऊपर प्राथमिकी की हम आलोचना करते हैं. प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई करें।"इन आरोपों पर पलटवार करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा, "कांग्रेस ने कल जो रवैया अपनाया वह दुर्भाग्यजनक है। भाजपा के आंदोलन के दौरान कांग्रेसियों ने डंडे लहराए। कांग्रेस पुलिस प्रशासन को धमकाने का काम कर रही है लेकिन इनकी धमकियों से कोई डरने वाला नहीं है। गुंडे किस पार्टी में हैं हमने बखूबी देखा है। हर अपराधों के पीछे कांग्रेस के लोग मिलते हैं।" उन्होंने कहा कि सड़क हो या सदन, कांग्रेस का आचरण जनता के सामने है और प्रदेश की जनता इसका जवाब देगी।
इधर, गौरेला में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री पटेल ने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 के बाद विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं और इसके पीछे एक संगठित माफिया सक्रिय है। उन्होंने कहा कि इससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है, लेकिन केंद्र सरकार प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस के निर्देश और लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संदेश पर कॉलेजों में छात्रों से संवाद किया गया, जहां युवाओं ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग का समर्थन किया।
श्री पटेल ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को पुलिस ने रोका। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यालयों पर हुए पथराव लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश का संकेत है।
राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और मंदिर के चढावे के संबंध में उन्होंने कहा, "जब भाजपा विधानसभा में मंदिर निर्माण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव ला सकती है, तो फिर चंदे का हिसाब देने से क्यों बच रही है? हमने और कांग्रेस के कई विधायकों ने भी राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया है। ऐसे में उसके उपयोग का हिसाब मांगना हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है."उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी इस मुद्दे पर रणनीति बना रही है और आने वाले समय में कथित चंदा अनियमितता, पेपर लीक तथा युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा, "कांग्रेस की कथनी और करनी में फर्क है। हमने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।पत्थरबाजी और उकसावे की शुरुआत कांग्रेस की ओर से हुई।"उन्होंने कहा, "राहुल गांधी ने संवैधानिक मर्यादा का पालन नहीं किया। पीएम आवास घेराव से पहले कोई सूचना नहीं दी गई। श्री गांधी नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें। विदेशी संस्कृति लाकर देश के लोगों को गुलाम बनाना चाहते हैं। "उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के खिलाफ असंवैधानिक टिप्पणी पर भाजपा कार्यकर्ता आक्रोशित हुए। हम शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, कांग्रेस को मिर्ची लगी तो हम क्या करें। पिटाई करनी होती तो अलग तैयारी करके आते, हम लड़ने नहीं गए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी भी घायल हुए। कानून ने उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई की है। "इससे पहले कांग्रेस ने रायपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा पर राजीव भवन पर सुनियोजित हमला कराने का आरोप लगाया। श्री शुक्ला ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता ट्रैक्टर में पत्थर, चप्पल और पानी के पाउच लेकर पहुंचे थे तथा पहले पानी के पाउच और बाद में पत्थर फेंके गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर आंसू गैस के गोले दागे, जबकि पुलिस संरक्षण में भाजपा कार्यकर्ता आगे बढ़े।
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