शिमला , अगस्त 13 -- राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने हिमाचल प्रदेश वन विभाग को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि एक संरक्षित वन क्षेत्र में लगे करीब 200 साल पुराने बरगद के पेड़ के चारों ओर सुरक्षा चबूतरे को किस आधार पर बनाया गया और क्या इसके लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी।
यह निर्देश एनजीटी की प्रधान पीठ ने गत 11 अगस्त को 'परमजीत मनकोटिया बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य व अन्य' याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। पीठ में अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफ़रोज़ अहमद शामिल थे।
याचिकाकर्ता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि संरक्षित वन क्षेत्र में लगे इस प्राचीन बरगद के पेड़ के चारों ओर आवश्यक अनुमति के बिना ही एक चबूतरे का अनाधिकृत निर्माण किया जा रहा है। इसके जवाब में अधिकारियों ने दलील दी कि यह कार्य बरगद के पेड़ के चारों ओर एक छोटा चबूतरा बनाने तक ही सीमित था। इसका उद्देश्य लगभग 200 साल पुराने पेड़ की रक्षा करना, उसकी जड़ों के पास मिट्टी के कटाव को रोकना और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। अधिकारियों ने कहा कि पेड़ की अत्यधिक उम्र, वहां लोगों की भारी आवाजाही, पास में स्थित एक सरकारी स्कूल और क्षेत्र में लगातार होने वाली भारी बारिश तथा प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए एक सुरक्षा उपाय के लिए यह निर्माण शुरू किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि निर्माण कार्य को पहले ही रोक दिया गया है।
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