अशोक टुटेजाताइपे , मई 31 -- ताइवान का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में क्या आता है? हर कोई ताइवान को उच्च प्रौद्योगिकी वाले उद्योगोंं ,खासकर दुनिया भर में सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का बेताज बादशाह मानता है। दूसरी बात जो मन में आती है, वह है इस द्वीप पर कब्जा करने की चीन की बुरी नीयत।

लेकिन भारत में बहुत कम लोगों को प्रशांत महासागर के पश्चिम में बसे इस खूबसूरत द्वीपीय देश की पर्यटन क्षमता के बारे में पता है। यह सचमुच सैलानियों और खासकर नये शादीशुदा जोड़ों के लिए किसी स्वर्ग जैसा है, जहाँ पुरानी संस्कृति, दिल छू लेने वाले प्राकृतिक नजारे, आधुनिक शहर एक साथ देखने को मिलते हैं। इस द्वीप पर शानदार 'स्ट्रीट फूड', खूबसूरत गर्म पानी के झरने और दर्शनीय प्राचीन मंदिर हैं। साथ ही, यह घूमने के लिहाज से काफी सस्ता और दुनिया की सबसे सुरक्षित जगहों में से एक है, जहां यातायात के बेहतरीन साधन उपलब्ध हैं।

फिलहाल भारत और ताइवान के बीच कोई सीधी उड़ान नहीं है। रिपोर्टों की मानें तो दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें शुरू करने के लिए सरकारी स्तर पर बातचीत चल रही है। लेकिन फिर भी कोई यात्री बैंकॉक, हांगकांग, सिंगापुर या कुआलालंपुर जैसे बड़े हवाई अड्डों से होकर ताइवान की राजधानी ताइपे और काऊशुंग शहर तक आसानी से पहुँच सकता है।

ताइवान की ऐतिहासिक और जिंदादिल राजधानी ताइपे का एक अलग ही जादू है। यह शहर अपनी 300 साल से ज्यादा पुरानी सांस्कृतिक जड़ों को आधुनिक महानगर के साथ बहुत खूबसूरती से समेटे हुए है। यहाँ की 'ताइपे 101 वेधशाला' ऐतिहासिक 508 मीटर ऊंची और 101 मंजिला गगनचुंबी इमारत है। बांस के पेड़ जैसी दिखने वाली अपनी खास बनावट के लिए मशहूर इस इमारत में एक बड़ा शानदार बाजार और आफिस हैं तथा इससे शहर के चारों तरफ का बेहतरीन नजारा देखा जा सकता है।

यहाँ का शियाओयूकेंग और यांगमिंगशान ज्वालामुखी क्षेत्र ताइपे के मुख्य शहर से महज 40 मिनट की दूरी पर है और बिल्कुल अलग ही दुनिया जैसा लगता है। शियाओयूकेंग इस क्षेत्र का अनोखा ज्वालामुखीय हिस्सा है, जहाँ जमीन से भाप निकलती दिखती है और जिसके भीतर से बेहतरीन सुगंध आती है। मई के महीने में यहाँ की पहाड़ियों पर गहरे नीले, बैंगनी और गुलाबी रंग के फूल एक अलग ही नजारा पेश करते हैं।

इसके साथ ही, ताइवान की कठपुतली कला (बुदैक्सी) को देखना भी एक अनोखा अनुभव है। यह कला लगभग 400 साल पुरानी है जिसका खुमार आज भी बरकरार है। लकड़ी से तराशे गए कठपुतलियों के चेहरे, उनकी सुंदर पोशाकें और उंगलियों को तेजी से नचाने की कला मिलकर ऐसा कमाल करती है कि देखने वाले दंग रह जाते हैं।

ताइवान के सबसे बड़े व्यापारिक शहर के रूप में काऊशुंग, ताइपे के बाद दूसरा सबसे पसंदीदा ठिकाना है। यहाँ वह सब कुछ है जो एक सैलानी देखना चाहता है - अच्छे खाने से लेकर संगीत और मनोरंजन तक। साल 2021 में तट के किनारे बना 'काऊशुंग संगीत केंद्र' एशिया की सबसे बड़ी तटीय सांस्कृतिक परियोजनाओं में से एक है। इसका मुख्य हिस्सा 'ध्वनि तरंग मीनार' है, जो आपस में जुड़े स्टील के पैनलों से बना है और देखने पर किसी विशाल संगीतमय लहर जैसा लगता है।

काऊशुंग का बड़ा बंदरगाह कभी ताइवान की तरक्की का मुख्य जरिया था। आज इस बड़े बंदरगाह के पुल और उसके आसपास के पुराने गोदामों को खूबसूरत कैफे, मयखानों और सार्वजनिक कला दीर्घाओं में बदल दिया गया है। रात के समय शहर की रोशनी के बीच पुल पर टहलना किसी फिल्म के खूबसूरत दृश्य जैसा सुकून देता है। इसी शहर में लियानचितान लियानचितान-लोटस पॉन्ड और ड्रैगन टाइगर पैगोडा भी है। काऊशुंग का चीनी मछली बाजार भी काफी मशहूर जगह है। यह बाजार दिखाता है कि ताइवान के लोगों का समुद्र से कितना गहरा रिश्ता है। यहाँ की दुकानें तरह-तरह की मछलियों और ऐसे समुद्री जीवों से भरी रहती हैं जिन्हें आम सैलानियों ने शायद ही पहले कभी देखा हो।

काऊशुंग के पास ही स्थित है शियाोलियूशियू (छोटा रीयूशियू द्वीप) जो ताइवान का अकेला पूरी तरह से मूंगे से बना द्वीप है। मुख्य भूमि से नाव के जरिए सिर्फ 30 मिनट में यहाँ पहुँचा जा सकता है। इस द्वीप की जिंदगी की रफ्तार बिल्कुल अलग है - बहुत शांत, सुकून भरी और गाड़ियों से पूरी तरह मुक्त। शियाोलियूशियू में जंगली हरे समुद्री कछुए (वाइल्ड ग्रीन सी टर्टल्स) देखने को मिलते हैं, जहां इन कछुओं के साथ गोताखोरी का आनंद लिया जा सकता है।

वहीं, 'दापेंग खाड़ी राष्ट्रीय दर्शनीय क्षेत्र' ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित एक शांत और बहुत बड़ी खाड़ी झील है, जो नौका विहार के लिए बहुत मशहूर है। दलदली जंगलों से घिरी और ताइवान जलडमरूमध्य से जुड़ी यह जगह पानी के खेलों के शौकीनों के लिए पसंदीदा जगह है। ताइवान के बीचों-बीच पहाड़ों में बसा 'योकाई विलेज' घने जंगलों के बीच जापानी पौराणिक लोक कथाओं की दुनिया की जिंदा मिसाल लगता है। यहाँ से पास ही शितौ बांस का जंगल है, जो ताइवान का सबसे मशहूर वन आरक्षित क्षेत्र है। यहाँ 1,150 मीटर की ऊंचाई पर बांस के हजारों ऊंचे पेड़ , जापानी देवदार और सरू के पेड़ फैले हुए हैं। मई का महीना यहाँ जुगनुओं की जगमग से भर जाता है, जो एशिया के सबसे जादुई वन्यजीव नजारों में से एक है।

प्रकृति के इन नजारों के बीच ताइवान की चाय का स्वाद एक अलग ही आनंद देता है। कमाल है कि यहां प्रतिदिन चाय के पारंपरिक समारोह होते हैं, जो चाय प्रेमी भारतीय सैलानियों के लिए एक अमिट याद बन जाती है। रोमांच के शौकीनों के लिए ताइवान के पास हौफेंग साइकिल ट्रैक है, जो नदी घाटी के साथ बनी एक पुरानी बंद हो चुकी रेलवे लाइन पर बना है। खूबसूरत पहाड़ी घाटियों के बीच से गुजरने वाला यह 13 किलोमीटर लंबा रास्ता साइकिल चलाने के लिए अद्भुत रोमांच देता है।

इस तरह ताइवान एक प्रौद्योगिकी संपन्न देश से इतर प्राकृतिक दृश्यों, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक शहरों से समृद्ध देश है जहां के जादुई जंगल, प्राचीन मंदिर और खूबसूरत आधुनिक शहर सैलानियों को कभी न भूलने वाले अनूठे अनुभव प्रदान करते हैं।

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