पटना , फरवरी 27 -- बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने शुक्रवार को प्राकृतिक खेती पर आयोजित एक दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला एवं जागरूकता कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
श्री यादव ने बामेती सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला एवं जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपनी जड़ों की ओर लौटें और प्राकृतिक खेती को अपनाकर मिट्टी, पानी और पर्यावरण की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती से मिट्टी की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जबकि प्राकृतिक खेती कम लागत, अधिक लाभ और सुरक्षित उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करती है।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में बिहार सरकार भी किसानों को रसायन मुक्त खेती की ओर प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में जैविक कॉरिडोर, प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं अनुदान योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिससे किसान बिना किसी आशंका के इस दिशा में आगे बढ़ सकें।
श्री यादव ने कहा कि राज्य में प्राकृतिक खेती को क्लस्टर आधारित मॉडल के तहत लागू किया जा रहा है। सभी 38 जिलों में 400 क्लस्टर चयनित किए गए हैं, जिनके माध्यम से 20 हजार हेक्टेयर (50 हजार एकड़) क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाया गया है। लगभग 50 हजार किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन एवं संसाधन सहयोग प्रदान किया जा रहा है। योजना के तहत प्रति किसान चार हजार रुपये वार्षिक (दो हजार रुपये खरीफ एवं दो हजार रुपये रबी) प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, जिससे वे जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, निमास्त्र एवं दशपर्णी अर्क जैसे जैविक उपादान तैयार कर सकें या जैव उपादान संसाधन केंद्रों से क्रय कर सकें।प्राकृतिक खेती एक ऐसी पद्धति है जिसमें स्थानीय बीज, देसी गाय के गोबर एवं गोमूत्र आधारित जैविक घोलों का उपयोग कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जाती है, जल संरक्षण होता है तथा फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है। रसायन मुक्त उत्पाद उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित एवं पोषक आहार प्रदान करते हैं।
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