पुणे , जून 10 -- प्रसिद्ध मराठी कवयित्री रोहिणीताई करंदीकर का संक्षिप्त बीमारी के बाद मंगलवार को गोवा में निधन हो गया।

वह 82 वर्ष की थीं। पारिवारिक सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

रोहिणी करंदीकर एक वरिष्ठ और अत्यंत सम्मानित कवयित्री थीं। उनकी कविताएं और लेख 'सत्याग्रही', 'अंतर्नाद', 'रोहिणी', 'कॉलेज कट्टा', 'छात्र प्रबोधन', 'फुलबाग' और 'प्रज्वलंत' सहित कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते थे। उनके काव्य संग्रहों जैसे कि "आर्त" और "पानाच्या जालीतून" को पाठकों के बीच व्यापक पहचान और सराहना मिली। उनकी कुछ कविताओं को संगीतबद्ध कर सीडी के रूप में भी जारी किया गया था।

उनके संगीतमय एलबम जैसे कि "गंध पौर्णिमेचा" (जिसमें सुरेश वाडकर और साधना सरगम ने सुर दिए थे) और "उठा उठा स्वामी" (जिसमें रवींद्र साठे और किशोर कुलकर्णी की आवाजें थीं) को लोगों द्वारा बेहद पसंद किया गया और वे कई घरों में चाव से सुने जाते थे। उन्होंने कुछ समय तक बहरीन में तैराकी प्रशिक्षक के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं।

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