गौतमबुद्धनगर , जुलाई 24 -- इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति एवं गौतमबुद्धनगर के प्रशासनिक न्यायाधीश श्री अजय भनोट ने अपने तीन दिवसीय जनपद भ्रमण के प्रथम दिन शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिला न्यायालय का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने न्यायालय की न्यायिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए न्यायिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिला प्रशासन द्वारा शुक्रवार को जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि,जिला न्यायालय पहुंचने पर माननीय प्रशासनिक न्यायाधीश का माननीय जिला न्यायाधीश, पुलिस आयुक्त, जिलाधिकारी तथा जनपद के सभी न्यायिक अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया।
निरीक्षण के दौरान आयोजित समीक्षा बैठक में न्यायमूर्ति श्री अजय भनोट ने न्यायिक अधिकारियों के साथ लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण, न्यायिक कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और आम नागरिकों को त्वरित एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए न्यायिक कार्यों में गुणवत्ता, जवाबदेही और समयबद्धता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं उत्तरदायी बनाने के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए।
इसके बाद गौतमबुद्धनगर बार एसोसिएशन की ओर से उनका सम्मान किया गया। इस अवसर पर उन्होंने अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए न्यायपालिका और अधिवक्ताओं के बीच बेहतर समन्वय, न्यायिक मर्यादा, पेशेवर आचरण और नैतिक मूल्यों के पालन पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को प्रभावी बनाने में अधिवक्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों से संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को भी गंभीरता से सुना।
अपने दौरे के दौरान प्रशासनिक न्यायाधीश ने जिला न्यायालय परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद उन्होंने न्यायालय परिसर का भ्रमण कर विभिन्न न्यायालयों एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने जनपद न्यायाधीश के कक्ष में न्यायिक अधिकारियों के साथ पुनः विचार-विमर्श किया तथा बैठक कक्ष में जिला न्यायालय के अधिकारियों और कर्मचारियों से संवाद करते हुए उनकी कार्यप्रणाली, उपलब्ध संसाधनों और न्यायालय के सुचारु संचालन से जुड़े विषयों की जानकारी ली। साथ ही आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया।
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