चंडीगढ़ , फरवरी 17 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने मोगा में सोमवार को भगवंत मान सरकार द्वारा आयोजित नशा विरोधी रैली के दौरान राज्य की प्रशासनिक मशीनरी के कथित दुरुपयोग की कड़ी निंदा की है।

श्री कैंथ ने मंगलवार को कहा कि वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों तथा पुलिस प्रशासन की एक राजनीतिक मंच पर दिखाई देने वाली उपस्थिति और भागीदारी नौकरशाही की निष्पक्षता के संवैधानिक सिद्धांत पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिविल सेवक संविधान और पंजाब की जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं, न कि किसी राजनीतिक दल के प्रचार या पक्षपातपूर्ण लाभ के साधन बनने के लिए।

श्री कैंथ ने कहा, "राजनीतिक रूप से प्रस्तुत कार्यक्रमों में उच्च अधिकारियों की भागीदारी स्थापित सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है और सार्वजनिक पद की गरिमा एवं विश्वसनीयता को कमजोर करती है।"उन्होंने कहा कि मान सरकार द्वारा बार-बार दावों और कई अभियानों के बावजूद पंजाब ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर ड्रग सप्लाई चेन को तोड़ने में असफल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई अधिकतर छोटे स्तर के अपराधियों तक सीमित रही है, जबकि बड़े तस्कर और संगठित नेटवर्क अक्सर जवाबदेही से बचते रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से भय या दबाव का माहौल बनाने का कोई भी प्रयास लोकतंत्र के लिए अत्यंत खतरनाक है। उन्होंने कहा, "जब पुलिस और प्रशासन किसी सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में झुके हुए प्रतीत होते हैं, तो जनता का विश्वास टूटता है और संस्थाएं कमजोर होती हैं, जिसका सीधा लाभ आपराधिक नेटवर्कों को मिलता है।"उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रैली के दौरान सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया गया, जिसमें सरकारी स्टाफ की तैनाती, परिवहन व्यवस्था और भीड़ जुटाने के उद्देश्य से खर्च शामिल है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक शासन प्रणाली का गंभीर दुरुपयोग है।

श्री कैंथ ने मांग की कि चूंकि अब तक मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक या राज्य सरकार द्वारा कोई स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है, इसलिए पंजाब के राज्यपाल को इस मामले का तत्काल संवैधानिक संज्ञान लेना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रशासन की निष्पक्षता हर स्थिति में सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा नौकरशाही के राजनीतिकरण की कड़ी निंदा करता है और मांग करता है कि इस मामले की निष्पक्ष जांचकर जवाबदेही तय की जाये, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रशासनिक गरिमा की रक्षा हो सके।

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