दरभंगा , अक्टूबर 08 -- न सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठते रहे हैं।श्री किशोर ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के सेवानिवृत्ति के बाद एचडीएफसी बैंक का चेयरमैन बनाए जाने का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि चुनाव के दौरान मतों से जुड़ी कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद सेवानिवृत्त हुए अधिकारी को बाद में इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों दी गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसे 'वोट की गड़बड़ी का इनाम' माना जाए।
श्री किशोर ने दरभंगा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि राजीव कुमार फरवरी 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से सेवानिवृत्त हुए और जुलाई 2026 में भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी के बाद एचडीएफसी बैंक के अंशकालिक चेयरमैन बने।
श्री किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, मतदाता सूची, चुनाव की तारीख, आदर्श आचार संहिता और मतगणना की प्रक्रिया में संस्थागत सुधार जरूरी है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का भरोसा मजबूत होना चाहिए।उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सर्वोपरि है तथा चुनाव प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह का संदेह लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।
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