प्रयागराज , जून 17 -- मोहर्रम का चांद नजर आते ही संगम नगरी प्रयागराज में गम-ए-हुसैन की फिजा छा गई। इसी क्रम में चांद रात को ऐतिहासिक 'लल्लन नाई के इमामबाड़े' से मोहर्रम का पहला अलम जुलूस पूरी अकीदत के साथ निकाला गया। यह जुलूस हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के 72 शहीदों की याद में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत मगरिब की नमाज के बाद फातेहा ख्वानी और तबर्रक वितरण से हुई। ईशा की नमाज के उपरांत अलम उठाया गया और जुलूस अपने पारंपरिक मार्ग पर रवाना हुआ। ढोल-ताशा और शहनाई की मातमी धुनों ने माहौल को हुसैनी रंग में रंग दिया। जुलूस में शामिल ई-रिक्शा पर सवार बच्चे "या अली, या हुसैन" के नारे बुलंद कर रहे थे। वहीं, महिलाएं अलम मुबारक पर फूल चढ़ाकर अपनी मन्नतें मांगती नजर आईं।
जुलूस जैसे ही शहर के प्रमुख मार्गों पर पहुंचा, अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे रास्ते "लबैक या हुसैन" और "या अली, या हुसैन" की सदाएं गूंजती रहीं।यह ऐतिहासिक अलम जुलूस दोंदीपुर, सुनारी गली, काटजू रोड, बरनताला, शाहनूर अलीगंज, सब्जी मंडी, घंटाघर, बजाजा पट्टी, कोतवाली, सिवई मंडी और पत्थर गली जैसे विभिन्न इलाकों से गुजरा। देर रात यह जुलूस पुनः इमामबाड़े पहुंचकर संपन्न हुआ।
इस अवसर पर मोहर्रम कमेटी द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आए ताजियादारों का साफा बांधकर और तबर्रक देकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सरफराज अहमद ने की। जुलूस के सफल संचालन में मेराज अहमद, फैयाज अहमद, समीर अहमद, मोहम्मद अफजल, मोहम्मद समद, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद फैजान, मोहम्मद सैफ सहित कई लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। पूरे मार्ग की निगरानी ड्रोन कैमरों के माध्यम से की गई। स्थानीय पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में यह ऐतिहासिक जुलूस पूरी तरह शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।
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