प्रयागराज , अक्टूबर 27 -- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में नैनी थाने से जुड़े एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट के मामले में पुलिस विभाग ने तीन चौकी प्रभारियों को निलंबित कर दिया है। प्रारंभिक जांच में उनकी भूमिका सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। मामले में बरामदगी की रकम में अंतर और गिरफ्तार युवकों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है।

मध्य प्रदेश के रीवा निवासी विपिन कुमार पाठक और आकाश सिंह को एनडीपीएस तथा आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के दौरान 6.55 लाख रुपये मिलने की बात सामने आई, जबकि मुकदमे में 87,500 रुपये की बरामदगी दर्ज की गई। इस अंतर को लेकर सवाल उठे हैं।

गिरफ्तार युवकों ने पुलिस पर फर्जी बरामदगी दिखाने और रुपये हड़पने का आरोप लगाया था। 15 अक्टूबर को अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट रजनीश कुमार मिश्र की अदालत ने पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज करते हुए आरोपियों की शिकायतों की जांच कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने पुलिस आयुक्त, प्रयागराज को जांच कर रिपोर्ट देने और संबंधित स्थान के सीसीटीवी फुटेज को भी जांच में शामिल करने को कहा था।

निलंबित किए गए उपनिरीक्षकों में अरैल चौकी प्रभारी विक्की गुप्ता, कांशीराम चौकी प्रभारी रामानंद विश्वकर्मा और कारागार चौकी प्रभारी नीलेश कुमार शामिल हैं। डीसीपी यमुनानगर विवेक चंद्र यादव ने तीनों के निलंबन की पुष्टि करते हुए बताया कि शुरुआती तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है और विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

मामले से जुड़े तीन ऑडियो भी सामने आए थे। इनमें गिरफ्तार युवकों में से एक की बातचीत एक अज्ञात बिचौलिए और उसके गांव के एक व्यक्ति से होने का दावा किया गया। बातचीत में दरोगा से मिलने, मुकदमे में दर्ज रकम को अदालत से रिलीज कराने और शेष रुपये वापस मिलने का जिक्र बताया गया। एक अन्य बातचीत में मामले को खत्म करने और सुलह की बात सामने आने का दावा किया गया।

पुलिस ने दोनों युवकों के पास से 40 पुड़िया स्मैक, नकदी, तमंचा, पिस्टल, कारतूस और मोबाइल फोन बरामद करने का दावा किया था। अदालत ने कथित तौर पर बरामद असलहों का निरीक्षण करने के बाद टिप्पणी की थी कि वे चलने की स्थिति में नहीं लग रहे थे और उन पर जंग लगी हुई थी। तलाशी और बरामदगी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए थे।

तीनों दरोगाओं के निलंबन के बाद विभागीय जांच की जाएगी। वहीं, अदालत के निर्देश पर आरोपियों की शिकायतों की जांच में बरामदगी संबंधी दस्तावेजों, रकम के अंतर और पुलिसकर्मियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।

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