प्रयागराज , सितंबर 21 -- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का सिविल लाइंस स्थित धरना स्थल पर पिछले 16 दिन से आमरण अनशन जारी है। रविवार देर शाम आंदोलनकारियों ने कफन ओढ़कर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से आंदोलन और आमरण अनशन के बावजूद उनकी मांगों पर समाधान नहीं होने के कारण उन्होंने खुद को मृत मानकर यह प्रदर्शन किया है।
अभ्यर्थी आकाश पांडेय ने बताया कि आंदोलन में शामिल एक साथी विजय की ब्रेन स्ट्रोक से मृत्यु हो गई। उनके मुताबिक विजय टीजीटी-पीजीटी और टीईटी की तैयारी कर रहे थे और नई नियमावली से परीक्षा एवं भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होने को लेकर परेशान थे।
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे कई वर्षों से शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। उनका आरोप है कि नई नियमावली में स्नातक में 50 प्रतिशत अंक, टीईटी और निगेटिव मार्किंग समेत अन्य प्रावधान किए गए हैं, जिससे बड़ी संख्या में पुराने अभ्यर्थियों के भर्ती प्रक्रिया से बाहर होने की स्थिति बन रही है।
अभ्यर्थियों ने बताया कि वे शिक्षा निदेशालय और जिलाधिकारी कार्यालय समेत कई स्थानों पर अपनी मांगें रख चुके हैं, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है। उनकी मांग है कि नई नियमावली लागू करने से पहले पुराने अभ्यर्थियों को कम से कम एक अवसर दिया जाए। आंदोलन में शामिल जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कई अभ्यर्थी 10 से 15 साल से शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। उनका आरोप है कि अंतिम समय में नियम बदलने से ऐसे अभ्यर्थियों के सामने भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता बंद हो रहा है।
उन्होंने दावा किया कि एक अभ्यर्थी चार साल से भर्ती का इंतजार कर रहा था और नई व्यवस्था के कारण परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने के तनाव में रहने लगा है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, अधिकांश अभ्यर्थी गरीब और ग्रामीण परिवारों से आते हैं तथा उनके पास महंगी कोचिंग या ट्यूशन की सुविधा नहीं है। ऐसे में स्नातक में 50 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन का आधार प्रतियोगी परीक्षा होना चाहिए और अभ्यर्थियों के वर्तमान ज्ञान का परीक्षण किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि नियमों में बदलाव किया जाना था तो इसकी जानकारी दो-तीन वर्ष पहले दी जानी चाहिए थी, ताकि अभ्यर्थी अपनी तैयारी और योग्यता के अनुरूप आवश्यक बदलाव कर सकें।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से नई नियमावली पर पुनर्विचार करने और प्रभावित अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मांगों पर विचार नहीं होने तक कफन ओढ़कर प्रदर्शन जारी रहेगा।
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