प्रयागराज , मार्च 01 -- होली का पर्व नजदीक आते ही पूरे देश में अबीर-गुलाल और रंगों की रौनक शुरू हो गई है। जहां मथुरा और बरसाना की लट्ठमार होली विश्व प्रसिद्ध है, वहीं संगम नगरी प्रयागराज में किन्नरों की होली अपनी अलग पहचान रखती है। प्रयागराज स्थित सनातनी किन्नर अखाड़ा में पांच दिनों तक रंगोत्सव मनाया जाता है। होली की शुरुआत किन्नर समुदाय अपनी इष्ट देवी बहुचरा माता की पूजा-अर्चना से करते हैं। सबसे पहले बहुचरा मां को अबीर-गुलाल अर्पित किया जाता है, इसके बाद भगवान शंकर को रंग अर्पित कर उत्सव की विधिवत शुरुआत होती है।

पूजा के उपरांत किन्नर होली गीतों और भजनों पर नाचते-गाते एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर खुशियां मनाते हैं। इस दौरान फूलों से भी होली खेली जाती है, जिससे वातावरण भक्तिमय और रंगमय हो उठता है।

रविवार को अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी उर्फ टीना मां ने भी अपने शिष्यों के साथ उत्साहपूर्वक होली खेली। किन्नर समुदाय न केवल स्वयं रंगों में सराबोर दिखा, बल्कि वहां आने वाले श्रद्धालुओं और आगंतुकों को भी अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया। इस प्रकार प्रयागराज में किन्नरों की होली आस्था, उल्लास और सामाजिक समरसता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करती है।

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