नयी दिल्ली , जनवरी 22 -- भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) प्रो. अजय कुमार सूद ने गुरुवार को पान मसाला और गुटखा की पैकेजिंग में बायो-प्लास्टिक के उपयोग को लेकर एक उच्चस्तरीय हितधारक परामर्श बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में इस दिशा में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करना और विभिन्न मंत्रालयों, नियामक संस्थाओं, उद्योग तथा शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वित और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना था।
श्री सूद ने बैठक में पान मसाला और गुटखा के सैशे पैकेजिंग के लिए स्वाभाविक रूप से सड़ने-योग्य (बायोडिग्रेडेबल) सामग्री की पहचान से जुड़े राष्ट्रीय प्रयासों और शोध गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और उपभोक्ता मामलों के विभाग के साथ पूर्व में हुई चर्चाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अब इस विषय पर एक स्पष्ट और समयबद्ध कार्ययोजना को अंतिम रूप देना आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी संगठन उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर एक स्पष्ट प्रक्रिया और समयसीमा तय करें। साथ ही उद्योग प्रतिनिधियों से कहा गया कि वे प्रस्तावित सामग्री के नमूने सीआईपीईटी को भेजें और अगली बैठक से पहले एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करें।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश गोखले ने कहा कि सैशे पैकेजिंग में प्रयुक्त पारंपरिक प्लास्टिक पर्यावरण के लिए एक गंभीर चुनौती है, क्योंकि यह आसानी से नष्ट नहीं होता। उन्होंने पॉली-लैक्टिक एसिड (पीएलए) को एक संभावनाशील स्वाभाविक रूप से सड़ने-योग्य सामग्री का विकल्प बताते हुए कहा कि इसकी लागत अपेक्षाकृत कम है और इसके व्यापक उपयोग के लिए सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वित व समयबद्ध प्रयासों की आवश्यकता है।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) के सचिव तन्मय कुमार ने बताया कि एमओईएफसीसी वर्तमान में बायो-प्लास्टिक की मौजूदा परिभाषा की समीक्षा कर रहा है और जैव-अपघटनीय सामग्री की एक स्पष्ट व वैज्ञानिक परिभाषा तैयार करने की प्रक्रिया में है। इससे बीआईएस को मानकीकृत परीक्षण प्रोटोकॉल विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की परामर्श बैठकें तकनीकी रूप से मजबूत और सर्वसम्मत ढांचा तैयार करने के लिए आवश्यक हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजित पुनहानी ने जोर देते हुए कहा कि स्वाभाविक रूप से सड़ने-योग्य पैकेजिंग की लागत उत्पाद की लागत से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पैकेजिंग से पान मसाला और गुटखा के स्वाद एवं सुगंध की रक्षा हो, एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित माइग्रेशन लिमिट्स का सख्ती से पालन हो और पैकेजिंग की सभी परतों से प्लास्टिक तथा एल्युमिनियम फॉयल को पूरी तरह हटाया जाए।
मानकों के दृष्टिकोण से बीआईएस ने बताया कि वर्तमान में उपलब्ध अधिकांश स्वाभाविक रूप से सड़ने-योग्य सामग्री केवल औद्योगिक कम्पोस्टिंग परिस्थितियों में ही नष्ट होती हैं, जिससे उनके संग्रह और प्रसंस्करण में व्यावहारिक चुनौतियां आती हैं। बैठक में आईआईटी मद्रास, आईआईटी बॉम्बे और रेवेंसॉ यूनिवर्सिटी जैसे शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ-साथ बालरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड, यूकेएचआई लिमिटेड और प्राज इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों ने भी अपने विचार और प्रस्तुतियां दीं।
बहु-हितधारक चर्चाओं के बाद इस निष्कर्ष पर सहमति बनी कि अब शोध और पायलट परियोजनाओं से आगे बढ़कर स्वाभाविक रूप से सड़ने-योग्य सामग्री के लिए एक संरचित परीक्षण, सत्यापन और प्रमाणन प्रक्रिया विकसित की जानी चाहिए।
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