नयी दिल्ली , जनवरी 29 -- केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने गुरूवार को संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में वर्ष 2024-25 में 4.19 करोड़ किसानों को सुरक्षा मिली, जो वर्ष 2022-23 से 32 प्रतिशत अधिक है। इस योजना ने 6.2 करोड़ हेक्टेयर भूमि कवर की, जो बीते वर्ष के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक है।

उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से, सरकार उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय बेहतर करने के लिए व्यापक स्तर पर पैमानों को लागू कर रही है। लागत, तकनीक, आय में सहयोग, बाजार और बीमा संबंधी मदद के माध्यम से कईं प्रमुख बदलाव किये गये हैं। इनमें से कई प्राथमिकताओं को मिशन-मोड स्तर पर लागू किया जा रहा है।

संसद में पेश की गयी समीक्षा में कहा गया है कि देश भर में क्षेत्र में विस्तार कर और पैदावार बेहतर कर धान, गेहूं, दालें, मोटा अनाज (मक्का और जौ), वाणिज्यिक फसलें (कपास, जूट और गन्ना), और पोषक अनाज (श्री अन्न) की पैदावार को बेहतर करने के लिए 2007 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन लागू हुआ था। वित्त वर्ष 2025 में, इस योजना का नाम बदलकर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन कर दिया गया था।

समीक्षा के अनुसार खाद्य तेल-तिलहन पर बने राष्ट्रीय मिशन का उद्देश्य तिलहन पैदावार में सुधार कर इसे 2030-31 तक 70 मिलियन टन करने का है। इन हस्तक्षेपों से तिलहन पैदावार बढ़ी है और इससे खाद्य तेल आयात कम करने में मदद मिली है। साल 2014-15 से 2024-25 तक के दशक में, तिलहन के क्षेत्र में 18 प्रतिशत, पैदावार में करीब 55 प्रतिशत और उत्पादकता में करीब 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इससे घरेलू खाद्य तेल की उपलब्धता 2015-16 में 86.30 लाख टन से बढ़कर 2023-24 में 121.75 लाख टन हो गई। इससे आयातित खाद्य तेल में गिरावट आई और बढ़ती घरेलू मांग एवं खपत के बावजूद, आयातित खाद्य तेल की मांग 2015-16 में 63.2 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 56.25 प्रतिशत रह गई।

दलहन आयात संबंधी निर्भरता को कम करने के लिए, दालों में आत्मनिर्भरता का मिशन योजना को एक अक्टूबर 2025 को मंजूरी दी गई।

केंद्र सरकार ने 2025 के बजट में, "पीएम धन धान्य कृषि योजना" के अंतर्गत कृषि की प्रमुखता वाले 100 जिलों के विकास की घोषणा की थी। इस योजना को जुलाई 2025 में मंजूरी मिली और यह वित्त वर्ष 2026 से छः-वर्ष के लिए शुरू हुयी है। यह 100 आकांक्षी जिलों में कार्य करेगा।

यह समीक्षा बताती है कि कृषि और इससे संबंधित गतिविधियों में मौजूदा कीमतों पर भारत की राष्ट्रीय आय के करीब पांचवे हिस्से तक कवर करती है। कृषि और इससे संबंधित गतिविधियों में रोजगार का एक बड़ा हिस्सा होने के साथ, यह क्षेत्र भारत के समग्र विकास की दिशा का केंद्र बिंदु है।

वर्ष 2014-15 में शुरु की गई बीज एवं रोपण सामग्री उप-मिशन के तहत 6.85 लाख बीज ग्राम स्थापित किए गए। इनमें 1649.26 लाख क्विंटल गुणवत्तापूर्ण बीजों का उत्पादन किया गया और 2.85 करोड़ किसानों को लाभ मिला है।

सर्वे के अनुसार सरकार सूक्ष्म सिंचाई को प्रोत्साहित करती है, जिसके अंतर्गत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर प्रणाली बनाने के छोटे एवं सीमांत किसानों को 55 प्रतिशत तथा अन्य किसानों को 45 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जाती है। इससे कुल सिंचित क्षेत्र का कुल बोए गए क्षेत्र में हिस्सा वर्ष 2001-02 के 41.7 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 55.8 प्रतिशत हो गया।

मिट्टी की सेहत में गिरावट भारत में कृषि के लिए एक बड़ी चुनौती है। सरकार ने इस समस्या के हल के लिए मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजनाएं लागू की हैं। इस योजना के तहत 25.55 करोड़ कार्ड (14 नवंबर 2025 तक) जारी हो चुके हैं।

भारत ने उर्वरक प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए है पोषक आधारित मूल्य, नीम कोटिंग यूरिया, आधार लिंक वेरिफिकेशन और इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम में सुधार से पारदर्शिता को बढ़ावा मिला है।

सरकार ने कृषि यंत्रीकऱण उप-मिशन से कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया जाता है। इसके अंतर्गत राज्य सरकारों को कृषि यंत्रों को चलाने की ट्रेनिंग, कस्टम हायरिंग सेटंर (सीएचसी) बनाने, तथा किसानों को कृषि उपकरणों को खरीदने में मदद की जाती है। 2014-15 से 2025-6 के दशक में इसके तहत कुल 25, 689 सीएचसी बने हैं, जिनमें 2025-26 के दौरान (30 अक्टूबर 2025 तक) स्थापित 558 सीएचसी शामिल हैं। इन केंद्रों से किसान कृषि उपकरणों को किराए पर लेते हैं।

सरकार ने 31 दिसंबर 2025 तक 49,796 भंडारण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई जिनके लिए 4,832.70 करोड़ रुपये जारी किए गए, जबकि 25,009 अन्य विपणन अवसंरचना परियोजनाओं को 2,193.16 करोड़ की सब्सिडी प्रदान की गई।

खेत स्तर की अवसंरचना मजबूत बनाने तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए बने कृषि अवसंरचना कोष से 27 नवंबर 2025 तक, 1,23,002 करोड़ की राशि जुटाई गई जिससे 39 हजार से अधिक कस्टमर हायरिंग सेंटर, लगभग 25 हजार से अधिक प्रोसेसिंग यूनिट, 17 हजार से अधिक गोदाम, 4 हजार से अधिक छंटाई और ग्रेडिंग यूनिट, 2700 से अधिक कोल्ड स्टोरेज परियोजाएं सहित अन्य सुविधाओं को मदद दी गयी।

किसान मंडियों को ऑनलाइन करने के लिए बने प्लेटफॉर्म ई-नाम पर 31 दिसंबर 2025 तक लगभग 1.79 करोड़ किसान, 2.72 करोड़ व्यापारी तथा 4698 एफपीओ पंजीकृत हो चुके हैं और यह मंच 23 राज्यों एवं 4 केन्द्र शासित प्रदेशों की 1,522 मंडियों को कवर करता है। सामूहिक विपणन को मजबूत करने के लिए सरकार ने वर्ष 2020 में नई एफपीओ योजना शुरु थी और 31 दिसंबर 2024 तक 10 हजार एफपीओ पंजीकृत किए जा चुके हैं।

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