भोपाल , अप्रैल 30 -- मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के आधार पर करीब ढाई करोड़ रुपए की संगठित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस प्रकरण में अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने दो अलग-अलग मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार पुलिस महानिदेशक के निर्देशन में की गई प्रारंभिक जांच में पाया गया कि संगठित गिरोह ने ग्वालियर, मुरैना, रतलाम सहित कई जिलों में सुनियोजित तरीके से इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया। गिरोह के सदस्यों ने विभिन्न बैंकों में फर्जी नामों से सैकड़ों खाते खोलकर इनके माध्यम से बड़ी संख्या में बीमा पॉलिसियां लीं।
जांच में सामने आया कि कई मामलों में एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम पर बीमा कराया गया, वहीं एक ही नाम-पते वाले व्यक्तियों के अलग-अलग बीमा कंपनियों में पॉलिसियां जारी कराई गईं। कई खातों और पॉलिसियों में एक ही मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी का उपयोग किए जाने से संदेह गहराया।
पुलिस के अनुसार अनेक मामलों में संबंधित व्यक्तियों की जानकारी के बिना ही उनके नाम पर बीमा कराया गया और बाद में एक माह से एक वर्ष के भीतर उन्हें मृत दर्शाते हुए नगरीय निकायों से कथित रूप से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर बीमा दावा प्राप्त कर लिया गया। कई मामलों में संबंधित व्यक्ति जीवित पाए गए, फिर भी उनके नाम पर क्लेम लिया गया।
धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को छिपाने के लिए गिरोह ने विभिन्न राज्यों तक फैला नेटवर्क तैयार किया। ग्वालियर और मुरैना में जमा राशि को रतलाम तथा राजस्थान के विभिन्न स्थानों के एटीएम से निकाला गया या अन्य खातों में स्थानांतरित किया गया। संदेहास्पद खातों को चिन्हित कर फ्रीज करने की कार्रवाई भी की गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में बीमित व्यक्ति का निवास एक स्थान पर दिखाया गया, जबकि मृत्यु किसी अन्य स्थान पर दर्शाकर वहां से प्रमाण पत्र जारी कराए गए। कुछ मामलों में एक ही परिवार के कई सदस्यों की मृत्यु अल्प अवधि में दर्शाकर बीमा राशि प्राप्त की गई।
पुलिस ने बताया कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को जीवन बीमा सुरक्षा देने के उद्देश्य से संचालित है, जिसका दुरुपयोग कर गिरोह ने बड़ा आर्थिक अपराध किया है। मामले में शामिल आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी तथा अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
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