सरगुजा/रायपुर , मार्च 19 -- छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में प्रधानमंत्री जनजाति न्याय महाभियान (पीएम-जनमन) योजना के तहत बन रही एक सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मैनपाट विकासखंड के एक दूरस्थ आदिवासी बहुल इलाके में निर्माणाधीन इस सड़क की डामर हाथों के जरिए आसानी से उठाई जा सकती है। हाथों से उठाकर सड़क को सड़क के पास रख देने का यह वीडियो जिले में वायरल हो रहा है।
उल्लेखनीय है यह मामला सीतापुर विकासखंड के कुनिया से मूसाखोल के बीच बन रही करीब 8.16 किलोमीटर लंबी सड़क का है। इस सड़क के निर्माण की समय सीमा 19 जनवरी 2026 निर्धारित की गई थी लेकिन दो महीने की देरी के बाद भी इसका काम अधूरा है और जो काम हुआ है, उसकी गुणवत्ता संदिग्ध बनी हुई है। करीब डेढ़ सौ की आबादी वाले इस आदिवासी गांव के लोगों को वर्षों बाद डामर की सड़क मिलने की उम्मीद थी लेकिन हालात देखकर वे निराश हैं।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे स्थानीय लोग सड़क की ऊपरी परत (वियरिंग कोर्ट) को आसानी से उठाकर किनारे रख रहे हैं, मानो वह पापड़ या रोटी की तरह भुरभुरी हो। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जिससे सड़क की मजबूती पर ही सवालिया निशान लग गए हैं।
निर्माण स्थल पर लगे सूचना पट्ट के अनुसार, यह परियोजना भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित है और राज्य शासन की एजेंसी छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास अभिकरण (सीजीआरडीए) की देखरेख में बन रही है। इस सड़क का ठेका जिले के सीतापुर की निर्माण कंपनी श्री साईं एसोसिएट को दिया गया है।
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