नयी दिल्ली , मार्च 10 -- केंद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री की विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद (पीएम-एसटीआईएसी) की मंगलवार को यहां 29वीं बैठक में उन्नत विनिर्माण प्रणालियों पर चर्चा की गई।
प्रो. सूद ने कहा कि विनिर्माण आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक स्वायत्तता का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने कहा कि उच्च परिशुद्धता मशीन टूल्स, सीएनसी नियंत्रण प्रणाली, रोबोटिक्स, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और परीक्षण एवं मेट्रोलॉजी अवसंरचना सहित उन्नत विनिर्माण प्रणालियाँ आधुनिक औद्योगिक उत्पादन और उद्योग 4.0 का आधार तैयार करते हैं।
उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने और तकनीकी निर्भरता कम करने के लिए इन प्रौद्योगिकियों में घरेलू क्षमता को मजबूत करना आवश्यक है। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार इस बैठक में प्रमुख सरकारी अधिकारियों, उद्योगपतियों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भारत के उन्नत विनिर्माण प्रणाली इकोसिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया।
बैठक में पीएम-एसटीआईएसी के सदस्य डॉ. ए.एस. किरण कुमार, पूर्व अध्यक्ष, इसरो; सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानिटकर, पूर्व उप प्रमुख एकीकृत रक्षा स्टाफ (चिकित्सा); प्रो. संघमित्रा बंद्योपाध्याय, पूर्व निदेशक, भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता; प्रो. सुभाष काक, प्रोफेसर, ओक्लाहोमा स्टेट यूनिवर्सिटी; बाबा कल्याणी, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, भारत फोर्ज और नीति आयोग के सदस्य (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी), डॉ. वी.के. सारस्वत बैठक में उपस्थित थे।
बैठक में डॉ. परविंदर मैनी (वैज्ञानिक सचिव, प्रधान वैज्ञानिक सलाकार कार्यालय) ; एस. कृष्णन ( सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय); प्रो. अभय करंदीकर ( सचिव, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग) और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी भी शामिल थी। परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत मोहंती; डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी. कामत; अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन; बीआईएस के महानिदेशक संजय गर्ग; एएनआरएफ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शिवकुमार कल्याणरामन; ग्राइंड मास्टर मशीन्स प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक और आईएमटीएमए की अध्यक्ष मोहिनी केलकर; ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पी.जी. जडेजा और भारत फ्रिट्ज वर्नर लिमिटेड (बीएफडब्ल्यू) के प्रबंध निदेशक श्री रवि राघवन भी बैठक में उपस्थित थे।
डॉ. सारस्वत ने कहा कि उत्पाद जीवनचक्र प्रबंधन, डिजिटल डिज़ाइन प्लेटफॉर्म और बहु-विषयक डिज़ाइन अनुकूलन जैसे डिजिटल इंजीनियरिंग उपकरणों ने आधुनिक इंजीनियरिंग और विनिर्माण प्रणालियों को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि विनिर्माण प्रौद्योगिकियों, प्लेटफार्मों, एल्गोरिदम और उपकरणों में घरेलू क्षमताओं के विकास के महत्व पर जोर दिया और स्वदेशी विनिर्माण समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग का आह्वान किया।
भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) के संयुक्त सचिव विजय मित्तल ने इस बात का उल्लेख किया कि मशीन टूल्स एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है जिसका विनिर्माण और जीडीपी पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।
बेंगलुरु स्थित केंद्रीय विनिर्माण प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएमटीआई) के निदेशक डॉ. नागहनुमैया ने स्वदेशी विकास के साथ-साथ परीक्षण, सत्यापन और प्रमाणन अवसंरचना की आवश्यकता पर बल दिया गया और स्थानीयकरण, रोबोटिक्स को अपनाने और घरेलू मूल्यवर्धन के लिए स्पष्ट लक्ष्यों के साथ एक मिशन-उन्मुख कार्यक्रम का प्रस्ताव रखा गया।
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